ओडिशा के कंधमाल जिले के दरिंगबाड़ी ब्लॉक स्थित एक सुदूर गांव में रहने वाले 73 वर्षीय दिहाड़ी मजदूर बुरसी प्रधान और उनकी पत्नी अनुसूया का छोटा सा घर आज उम्मीद और सफलता की एक बड़ी मिसाल बन गया है। अभाव और तंगी के बीच जहां, हजारों लोग अपने इच्छाओं और जरूरतों को दबाते हुए अपने सपनों को छोड़ देते हैं। वहां आर्थिक तंगी में जीवन बिताने वाले इस मजदूर परिवार के चार सगे बच्चों और एक भतीजी ने देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक 'नीट' (NEET) को क्रैक कर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस (MBBS) की सीटें हासिल की हैं। जहां परिवार से एक बच्चा भी डॉक्टर निकल जाए, तो माता-पिता और परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं होता है, वहीं देहाड़ी मजदूर बुरसी प्रधान के परिवार से एक या दो नहीं बल्कि 5 बच्चे डॉक्टर बनने के लिए एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं।
एक परिवार के 5 बच्चों ने NEET पास कर रचा इतिहास (Photo - AI)
बड़े बेटे ने दिखाई राह एमबीबीएस की राह
परिवार को गरीबी से बाहर निकालने का मार्ग बुरसी के बड़े बेटे बिभीषण प्रधान ने बनाया। जी हां, साल 2021 में बिभीषण ने नीट परीक्षा में सफलता हासिल की और कोरापुट स्थित श्री लक्ष्मण नायक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में दाखिला लिया। बड़े भाई की इस उपलब्धि ने परिवार के अन्य बच्चों के लिए प्रेरणा का काम किया। बिभीषण के बाद उनकी बहन मोनलिसा ने भी नीट की परीक्षा में सफलता प्राप्त की और अपने बड़े भाई के कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू की।
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एक ही साल में परिवार के 3 ने पाई मेडिकल की सीट
2 बच्चों ने शुरू की मेडिकल की पढ़ाई का सिलसिला यही नहीं रुका। बुरसी प्रधान के घर में खुशियां तब और बढ़ गई, जब एक साथ परिवार के तीन अन्य बच्चों ने मेडिकल कॉलेजों में अपनी जगह बनाई। जी हां, बुरसी के दो बच्चों असारिया प्रधान और सुनेमी प्रधान के साथ उनके छोटे भाई की बेटी मीनाक्षी ने भी नीट परीक्षा पास कर सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS की सीट पक्की की।
| बिभीषण प्रधान (बेटा) | श्री लक्ष्मण नायक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल |
| मोनलिसा प्रधान (बेटी) | श्री लक्ष्मण नायक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल |
| असारिया प्रधान (बेटा) | शहीद रिंडो माझी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, भवानीपटना |
| सुनेमी प्रधान (बेटी) | भीम भोई मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, बलांगीर |
| मीनाक्षी प्रधान (भतीजी) | श्री जगन्नाथ मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, पुरी |
त्याग, मजदूरी और जमीन का टुकड़ा
सात बच्चों के पिता बुरसी प्रधान की मेहनत से ही आज उनके बच्चों डॉक्टर बनने वाले हैं। अपनी थोड़ी सी जमीन पर उन्होंने धान, अदरक और हल्दी की खेती कर बच्चों को पढ़वाया। जब खेती से बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च पूरा नहीं हुआ, तो उन्होंने केरल जैसे दूरदराज के राज्यों में जाकर मजदूरी की। हालांकि, बीमारी के कारण उन्हें एक समय पर घर लौटने पड़ा। लेकिन बच्चों की पढ़ाई और बेहतरीन करियर के लिए उन्होंने हिम्मत नहीं जारी और स्थानीय स्तर पर मजदूरी का काम कर घर के खर्च के साथ बच्चों की पढ़ाई करवाई।
