NCERT Book Making Process: कैसे तय होता है आपकी स्कूल की किताबों का हर चैप्टर? जानें पर्दे के पीछे की पूरी कहानी

NCERT Book Making Process: स्कूलों में NCERT की किताबों से पढ़ाई होती है। लेकिन इन किताबों को पढ़ते हुए आपने कभी सोचा की इसे बनाने का प्रोसेस क्या है। इन्हें किस आधार पर तैयार किया जाता है। किताबों में दिए गए चैप्टर कैसे तय होते हैं, क्या कंटेंट जाएगा क्या नहीं इसका फैसला किस आधार पर लिया जाता है। आइए आज जानते हैं NCERT बुक के चैप्टर कैसे तय किए जाते हैं।

NCERT Book Making Process: शिक्षा किसी भी राष्ट्र के निर्माण की आधारशिला मानी जाती है। कहा जाता है कि शिक्षा नहीं, तो कुछ भी नहीं। और शिक्षा के लिए पाठ्यपुस्तकों (Textbooks) की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। भारतीय स्कूलों में NCERT की किताबें पढ़ी जाती हैं। इन्हें तैयार करना मात्र एक लेखन कार्य नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक और गहन शोध आधारित प्रक्रिया है। बच्चों को क्या पढ़ाना है, क्या समझाना है और क्या उनके उम्र के अनुसार सही है, इसे तय करना कोई आसान काम नहीं है। यही वजह है कि इसकी शुरुआत नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) से होती है, जो शिक्षा की दिशा और बच्चों के सीखने के तौर-तरीकों का खाका खींचता है। लेकिन इस बीच आपने कभी सोचा की NCERT की किताबें कैसे तैयार की जाती है। किस आधार पर चैप्टर बनाएं जाते हैं, क्या पढ़ाया जाएगा क्या नहीं यह तय किया जाता है और इसमें बदलाव कैसे होते हैं। तो आइए आज आपको इस सबके बारे में विस्तार के बताएं।

NCERT Book Making Process

कैसे तय होता है आपकी स्कूल की किताबों का हर चैप्टर

बुक की नींव का निर्धारण कौन करता है?

किसी भी किताब को लिखने की शुरुआत नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) से होती है। यह फ्रेमवर्क तय करता है कि बच्चों को क्या पढ़ाया जाना चाहिए, कंटेंट का तरीका कैसा होगा और पढ़ाई की दिशा क्या रहेगी। जब यह आधार तय हो जाता है, तब हर कक्षा और विषय के लिए अलग-अलग सिलेबस तैयार किया जाता है।

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