UPSC Completes 100 Years: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के 100 साल पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार 1 अक्टूबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित शताब्दी समारोह को संबोधित किया। उन्होंने बदलते समय के साथ देश की सरकारी सेवाओं और अधिकारियों की भूमिका में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने देश के युवाओं और महिलाओं को लेकर खास बातें कही हैं।
PM मोदी ने कहा 'सिविल सर्विस में लोकसेवा के लिए आएं, सिर्फ पद के लिए नहीं'
'लोकसेवा के लिए आएं, सिर्फ पद के लिए नहीं'
PM मोदी ने कहा कि आज जिन युवाओं का चयन सरकारी सेवाओं में हो रहा है, वे विकसित भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि सिविल सर्विस में ऐसे युवाओं को लाने की जरूरत है, जिनमें लोगों की सेवा करने की भावना हो, न कि केवल सरकारी पद हासिल करने की इच्छा।
उन्होंने यह भी कहा कि देश में एक समय सरकार को 'माई-बाप' की तरह देखा जाता था, लेकिन अब व्यवस्था को 'नागरिक देवो भव' की सोच के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है।
तेजी से बदल रही दुनिया, परीक्षा में भी बदलाव जरूरी
प्रधानमंत्री ने सरकारी सेवाओं के सामने बदलती चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि आज सवाल केवल सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने का नहीं है। असली चुनौती यह है कि क्या सरकारी व्यवस्था उस रफ्तार से काम कर पा रही है, जिसकी उम्मीद आज के नागरिक करते हैं।
उन्होंने UPSC की परीक्षा व्यवस्था में भी बदलाव की जरूरत बताई। उनके मुताबिक उम्मीदवारों को केवल किताबी ज्ञान के आधार पर परखने के बजाय जटिल समस्याओं को हल करने की क्षमता और दूर की सोच को भी जांचना चाहिए।
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी जिक्र
PM मोदी ने UPSC के 100 साल के सफर में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आयोग के इतिहास में रहे चार महिला अध्यक्षों में से तीन की नियुक्ति 2014 के बाद हुई है। उनके अनुसार यह सार्वजनिक सेवाओं में अवसरों के विस्तार को दिखाता है।
बता दें, UPSC की स्थापना 1 अक्टूबर 1926 को हुई थी और यह आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के रूप में काम करता है।
