उत्तराखंड सरकार ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में एक ऐतिहासिक और बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने प्रदेश में अभी तक काम कर रहे मदरसा बोर्ड को समाप्त कर दिया है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर पोस्ट कर इसकी जानाकरी दी। सीएम ने पोस्ट में लिखा की प्रदेश में अब "उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम" को पूरी तरह प्रभावी कर दिया गया है। इस नए कानून के लागू होने के साथ ही वर्षों से चले आ रहे 'मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम' और 'गैर-सरकारी अरबी-फारसी मदरसा मान्यता नियम' को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है।
उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड समाप्त (Photo - Facebook)
समान और पारदर्शी मान्यता प्रणाली
मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रदेश के भीतर एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था खड़ी करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, जो आधुनिक होने के साथ-साथ पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और जवाबदेह हो। उन्होंने बताया कि नया "अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम" लागू होने से राज्य के सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए एक समान और स्पष्ट मान्यता प्रणाली सुनिश्चित होगी। इससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और शिक्षा के स्तर में भी सुधार होगा।
आधुनिक शिक्षा और भारतीय मूल्यों का होगा संगम
इस बड़े प्रशासनिक और कानूनी बदलाव का मुख्य उद्देश्य राज्य के बच्चों का भविष्य सुरक्षित और मजबूत बनाना है। सरकार का संकल्प है कि प्रदेश का हर बच्चा आधुनिक शिक्षा और विज्ञान से जुड़े। वह टेक्नोलॉजी और स्किल डेवलपमेंट में निपुण हो। वह भारतीय जीवन मूल्यों और राष्ट्र निर्माण की भावना से सशक्त बने।
'विकसित भारत' के निर्माण में योगदान
उत्तराखंड सरकार का मानना है कि जब राज्य के बच्चों को सही मायने में गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा मिलेगी, तभी वे 'विकसित उत्तराखंड' और 'विकसित भारत' के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे। इसी दूरदर्शी लक्ष्य को सामने रखकर राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में लगातार कड़े और सुधारात्मक कदम उठा रही है। यह नया कानून शिक्षा के लोकतंत्रीकरण और छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ाया गया एक मजबूत कदम है।
