Jharkhand TET 2026: झारखंड में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए बड़ी खबर सामने आई है। Jharkhand Academic Council द्वारा जारी झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) 2026 का विज्ञापन अब रद्द होने की कगार पर है। इसकी मुख्य वजह बना है क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर उठ खड़ा हुआ विवाद, जिसने पूरे भर्ती प्रोसेस को रोक दिया है।
Jharkhand TET 2026 (image - chatgpt)
क्या है पूरा मामला? (Jharkhand TET 2026 News)
दरअसल, झारखंड सरकार ने TET 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया 21 अप्रैल से 21 मई तक तय की थी। यह विज्ञापन मंत्रिपरिषद की मंजूरी की उम्मीद में जारी किया गया था। लेकिन हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर सहमति नहीं बन सकी, जिसके चलते पूरी प्रक्रिया फिलहाल ठप हो गई है।
भाषाई विवाद क्यों बना सबसे बड़ा कारण? Jharkhand TET 2026
नए नियमों में एक बड़ा बदलाव यह किया गया था कि क्षेत्रीय भाषाओं की सूची में भोजपुरी, अंगिका और मगही को शामिल नहीं किया गया। जबकि ये भाषाएं राज्य के 10 से अधिक जिलों में बोली जाती हैं।
इसके उलट, उड़िया भाषा- जो सीमित क्षेत्रों में बोली जाती है - को सूची में जगह दी गई। इसी फैसले ने राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों के विरोध को जन्म दिया।
कैबिनेट बैठक में भी मंत्री जैसे Radhakrishna Kishore, Deepak Birua और Deepika Pandey Singh ने इस पर खुलकर आपत्ति जताई।
jharkhand tet 2026
सरकार का रुख और आगे की स्थिति
मुख्यमंत्री Hemant Soren की मंजूरी के बाद 26 मार्च को अधिसूचना जारी की गई थी, लेकिन कैबिनेट स्तर पर अंतिम मुहर नहीं लग पाई। अब सरकार के सामने दो विकल्प हैं:
- या तो मौजूदा नियमों के साथ आगे बढ़े
- या फिर भाषाओं को जोड़कर संशोधित नियमावली जारी करे
- यदि संशोधन किया जाता है, तो वर्तमान विज्ञापन को पूरी तरह वापस लेना पड़ेगा।
अभ्यर्थियों पर क्या पड़ेगा असर?
झारखंड में पिछले 10 वर्षों से TET परीक्षा नियमित रूप से आयोजित नहीं हुई है। इससे 2016 के बाद B.Ed करने वाले हजारों अभ्यर्थी प्रभावित हो रहे हैं।
- वे TET परीक्षा में शामिल नहीं हो पा रहे
- शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में भी हिस्सा नहीं ले पा रहे
Jharkhand TET History (Important Fact)
- अब तक केवल 2012 और 2026 में ही TET आयोजित हुआ है।
- हर साल परीक्षा कराने का नियम होने के बावजूद इसे लागू नहीं किया गया।
अनिश्चितता के बीच उम्मीद
झारखंड TET 2026 फिलहाल अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। भाषाई संतुलन और राजनीतिक सहमति के बिना इस परीक्षा का आयोजन मुश्किल दिख रहा है। हालांकि, उम्मीद है कि सरकार जल्द कोई ठोस निर्णय लेकर छात्रों को राहत देगी।
