दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ की बहाली की मांग को लेकर जारी प्रदर्शन के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने अगले आदेश तक सभी कक्षाएं ऑनलाइन मोड में संचालित करने का फैसला लिया है। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी को लेकर उठे विवाद और छात्रों के आंदोलन के बीच विश्वविद्यालय का माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। छात्र पिछले कई हफ्तों से छात्रसंघ चुनाव कराने और जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) को बहाल करने की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही प्रदर्शनकारी छात्रों ने मुख्य प्रॉक्टर को हटाने की मांग भी उठाई है। छात्रों का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
जामिया में प्रदर्शन के बीच बड़ा फैसला, अगले आदेश तक ऑनलाइन चलेंगी कक्षाएं
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छात्रों के मुताबिक, 12 अक्टूबर को पांच छात्रों ने छात्रसंघ की बहाली की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। भूख हड़ताल पर बैठने वाले छात्रों में एबिन बेसिल, मोहम्मद जासिम खान, रेहान हैदर, रेहान पवार और फैजान अली खान शामिल हैं। इसके बाद आंदोलन ने जोर पकड़ लिया। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन की एक बड़ी टीम उनसे बातचीत करने पहुंची थी। टीम में बड़ी संख्या में प्रोफेसर और गैर-शिक्षण कर्मचारी शामिल थे। छात्रों का दावा है कि शुरुआत में उन्हें प्रदर्शन समाप्त करने के लिए समझाया गया, लेकिन बाद में उन पर दबाव बनाया गया। आरोप है कि इस दौरान छात्रों के साथ धक्का-मुक्की की गई, उनके टेंट उखाड़ दिए गए और उन्हें धमकियां भी दी गईं।
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वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन ने मौजूदा परिस्थितियों और छात्रों की सुरक्षा का हवाला देते हुए अगले आदेश तक कक्षाएं ऑनलाइन संचालित करने का नोटिस जारी किया है। हालांकि, छात्रों की ओर से लगाए गए धक्का-मुक्की और धमकी के आरोपों पर प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है। जामिया में छात्रसंघ की बहाली की मांग अब विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच टकराव का मुद्दा बनती जा रही है। गौरतलब है कि जामिया का छात्रसंघ मार्च 2006 में भंग कर दिया गया था। ऐसे में करीब दो दशक बाद छात्रसंघ की बहाली की मांग को लेकर जारी आंदोलन के बीच ऑनलाइन कक्षाओं का फैसला चर्चा में है। अब सवाल यह है कि विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत से कोई रास्ता निकलता है या आंदोलन आगे और तेज होता है।
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