Indian Army Rule: आर्मी में किस तरह के घुटनों की अनुमति नहीं है? जानें क्या कहते हैं नियम

Indian Army Rule: भारतीय सेना में शामिल होने के लिए लिखित परीक्षा के साथ फिजिकल टेस्ट भी बहुत महत्वपूर्ण है। इस दौरान उम्मीदवारों के घुटनों की बारीकी से जांच की जाती है। तो आइए जानते हैं कि सेना में किस तरह के घुटनों की अनुमति नहीं है।

Indian Army Rule: भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना लाखों युवाओं का सपना होता है। लेकिन इस सपने को पूरा करने के लिए केवल लिखित परीक्षा पास करना ही काफी नहीं है, बल्कि कड़े शारीरिक और मेडिकल स्टैंडर्ड्स पर भी खरा उतरना उतना ही अनिवार्य होता है। सेना भर्ती (Indian Army) के दौरान शारीरिक जांच का स्तर बहुत ही सूक्ष्म और सख्त होता है, इसमें उम्मीदवार के शरीर की बारीकी से जांच की जाती है, जिसमें उम्मीदवार की पैरों की संरचना भी जांच शामिल है। मेडिकल टेस्ट के दौरान घुटनों से जुड़ी जरा सी भी विकृति अभ्यर्थी को अयोग्य ठहरा सकती है। आइए जानते हैं कि सेना भर्ती में किस तरह के घुटनों की अनुमति नहीं होती और इससे जुड़े मेडिकल नियम क्या कहते हैं।

Indian Army Rule

आर्मी में किस तरह के घुटनों की अनुमति नहीं है (Photo - AI)

नोक नी

सेना में घुटनों से जुड़ी सबसे आम विकृति है 'नोक नी' (Knock Knees) है, जिसे मेडिकल भाषा में जेनू वैल्गम (Genu Valgum) भी कहा जाता है। अब उम्मीदवारों के मन में सबसे यह सवाल जरूर आया होगा की आखिर नोक नी स्थिति क्या है? उदाहरण के तौर पर समझे तो जब कोई व्यक्ति सावधान की मुद्रा में सीधा खड़ा होता है और उसके दोनों टखने (Ankles) एक-दूसरे से दूर रहते हैं, लेकिन दोनों घुटने आपस में टकराते हैं या सटते हैं, तो इस स्थिति को नोक नी कहा जाता है।

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