देश की सेवा करने और भारतीय सेना में अधिकारी बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर सामने आई है। रक्षा मंत्रालय सेना की भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, आसान, तेज और आधुनिक बनाने के लिए एक ऐतिहासिक योजना पर काम कर रहा है। प्रस्तावित बदलावों के अनुसार बात करें तो सेना अब अलग-अलग लिखित परीक्षाएं आयोजित करने के बजाय देश की प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के स्कोर के आधार पर उम्मीदवारों को सीधे सर्विस सिलेक्शन बोर्ड (SSB) इंटरव्यू के लिए आमंत्रित कर सकती है।
JEE, CLAT और NEET स्कोर से भारतीय सेना में बनेंगे अधिकारी (Photo - AI)
भर्ती प्रक्रिया में आएगी तेजी
Indian Army में लंबे समय से देखी जा रही अधिकारियों की कमी की चुनौती से निपटने के लिए रक्षा मंत्रालय यह कदम उठाने की योजना बना रहा है। अलग से लिखित परीक्षा कराने, उनके परिणाम जारी करने और फिर चयन प्रक्रिया शुरू करने में काफी समय लगता है। राष्ट्रीय परीक्षाओं के स्कोर का उपयोग करने से भर्ती में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा और प्रक्रिया पहले से ज्यादा तेज और प्रभावी बनेगी। इससे छात्रों को भी लाभ होगा कि उन्हें कई प्रकार की परीक्षाओं में शामिल होना नहीं पड़ेगा।
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किन परीक्षाओं के आधार पर मिलेगी कौन सी शाखा में एंट्री?
बता दें कि जेईई, नीट और क्लैट पीजी के स्कोर के आधार पर सेना में भर्ती के अवसर दिए जाएंगे। लेकिन किस परीक्षा के आधार पर किस शाखा में भर्ती का मौका दिया जाएगा, उसकी जानकारी इस प्रकार है -
टेक्निकल एंट्री स्कीम (TES): 12वीं पास (PCM) साइंस वर्ग के छात्रों के लिए आयोजित होने वाली इस योजना में अब 12वीं के अंकों की बाध्यता के बजाय केवल JEE स्कोर के आधार पर सीधे एसएसबी इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाएगा।
जज एडवोकेट जनरल (JAG) शाखा: कानून के क्षेत्र में स्नातकोत्तर छात्रों के लिए सेना की लीगल ब्रांच में अब CLAT PG के मार्क्स के आधार पर अभ्यर्थियों को बुलावा भेजा जाएगा।
आर्मी मेडिकल कोर: मेडिकल क्षेत्र से जुड़ी भर्ती प्रक्रियाओं में NEET PG के स्कोर को मुख्य आधार बनाने की योजना है, जिससे मेडिकल स्नातकों को अलग से सैन्य परीक्षा नहीं देनी होगी।
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युवाओं और सरकार दोनों के लिए 'विन-विन सिचुएशन'
इस योजना के तहत न केवल युवाओं को लाभ होगा, बल्कि सरकार को भी इसका फायदा मिलेगा। योजना के तहत राष्ट्रीय परीक्षाओं में पहले से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्रों को अलग से किसी सैन्य प्रवेश परीक्षा की तैयारी नहीं करनी पड़ेगी। अभ्यर्थियों को बार-बार अलग से आवेदन करने और परीक्षा शुल्क चुकाने के झंझट से मुक्ति मिलेगी। यह तो हुए युवाओं के फायदें। अब अगर बात करें सरकार के लाभ की इससे सरकारी खजाने की बचत होगी। आप सोच रहे होंगे कैसे, तो बता दें कि अगल से बड़े स्तर पर भर्ती परीक्षा का आयोजन कराने में भारी-भरकम खर्च होता है, जो बचेगा। देश के टॉप रैंकर्स सीधे सेना के चयन तंत्र तक पहुंच सकेंगे, जिससे आर्म्ड फोर्स को योग्य और सक्षम नेतृत्व मिलेगा।
