जिस समुद्री रास्ते पर कांपते थे बड़े-बड़े कैप्टन, वहां भारत की इस पहली महिला मरीन पायलट ने गाड़ा झंडा

पुरुषों के दबदबे वाले मरीन और मर्चेंट नेवी में Reshma Nilofer Visalakshi ने पहली महिला मरीन पायलट बन इतिहास रच दिया है। एक छोटे से क्वार्टर से मर्चेंट नेवी के उनके सफर के बारे में विस्तार से जानते हैं।

Indias First Woman Marine Pilot Reshma Nilofer Visalakshi: कहावत है कि "मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।" इस कहावत को सच कर दिखाया है रेशमा नीलोफर विशालाक्षी (Reshma Nilofer Visalakshi) ने। पुरुषों के दबदबे वाले समुद्री पेशे में उन्होंने एक ऐसा इतिहास रचा है, जिससे हजारों लड़कियों को प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने न केवल सामाजिक बाधाओं और लोगों की संकीर्ण सोच को बदला है बल्कि भारत के सबसे खतरनाक और मुश्किल समुद्री जलमार्गों पर बड़े-बड़े जहाजों को सुरक्षित पार कराकर इतिहास रचा है। चेन्नई के एक छोटे से क्वार्टर से निकलकर देश की पहली महिला मरीन पायलट बनने का उनका यह सफर अदम्य साहस, कठोर अनुशासन और समाज में अपना लोहा मनवाने के पक्के इरादे की एक मिसाल है। आइए आज उनकी सफलता की कहानी के बारे में विस्तार से जानें।

Reshma Nilofer Visalakshi

Reshma Nilofer Visalakshi (Photo - AI/Newsroom Verified)

छोटे से क्वार्टर से मर्चेंट नेवी का सफर

रेश्मा का बचपन चेन्नई में महज 600 स्क्वायर फीट के एक छोटे से सरकारी क्वार्टर में बीता। उन्होंने शिक्षा भी चेन्नई में ही प्राप्त की। केंद्र सरकार के कर्मचारी माता-पिता की मरीन और मर्चेंट नेवी के कोई रिश्ता-नाता नहीं था। लेकिन किस्मत ने यह नाता रेश्मा के माध्यम से जोड़ा। आम सी जिंदगी जी रही रेशमा की लाइफ में बड़ा मोड़ तब आया, जब उन्होंने अखबार में एक शिपिंग कंपनी के 'डुअल कॉम्पिटेंसी प्रोग्राम' का विज्ञापन देखा। इस ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए 4 हजार से अधिक युवाओं ने अपनी किस्मत आजमाई थी, लेकिन रेशमा सबको पीछे छोड़ते हुए चुने गए 300 अभ्यर्थियों में अपनी जगह बनाई।

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