IAS Surabhi Gautam Success Story in Hindi, UPSC Tips in Hindi: प्रतिभा किसी संसाधन का मोहताज नहीं होती है। होनहार ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले भी होते हैं।अंग्रेजी में हाथ तंग होने वाले भी सफलता का परचम लहराते हैं। इस बात को साबित कर दिखाया मध्य प्रदेश के सतना जिले के अमदरा गांव की रहने वाली सुरभि गौतम ने। यूपीएससी द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा 2015 में 50वीं रैंक लाकर इतिहास रचने वाली IAS सुरभि गौतम का सफर आसान नहीं रहा। हिंदी मीडियम की स्टूडेंट सुरभि अंग्रेजी में थीं कमजोर, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी।
IAS Surabhi Gautam Success Story in Hindi
कौन हैं आईएएस सुरभि गौतम
आईएएस अफसर सुरभि गौतम मध्य प्रदेश के सतना जिले के अमदरा गांव की रहने वाली हैं। उनकी स्कूल लेवल की पढ़ाई-लिखाई गांव के ही स्कूल से हुई। 10वीं के बोर्ड एग्जाम में 93.4% नंबर हासिल किया। गणित में तो 100 में 100 नंबर थे।यूपीएससी द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा 2015 में 50वीं रैंक लाकर इतिहास रचने वाली IAS सुरभि गौतम का सफर आसान नहीं रहा। सुरभि गौतम के 12वीं में इसके बावजूद काफी अच्छे मार्क्स आए लेकिन वह रूमेटिक बुखार से गंभीर रूप से पीड़ित थीं। उन्हें हर 15 दिन में गांव से 150 किलोमीटर दूर जबलपुर इलाज के लिए जाना पड़ता था।
आईईएस परीक्षा में पाई पहली रैंक
हिंदी मीडियम की स्टूडेंट सुरभि अंग्रेजी में थीं कमजोर, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। अंग्रेजी भाषा से परेशान होकर सुरभि ने अपनी अंग्रेजी सुधारने के लिए खुद से अंग्रेजी में बात करना शुरू कर दिया। वर्ष 2013 में, सुरभि ने आईईएस परीक्षा पास की और ऑल इंडिया फर्स्ट रैंक हासिल की। लेकिन सुरभि का लक्ष्य आईएएस बनने का था। सुरभि ने भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग पूरी की। उन्होंने विश्वविद्यालय में टॉप की एवं अपने प्रदर्शन के लिए स्वर्ण पदक प्राप्त किया।
आधा दर्जन परीक्षाओं में सफलता
सुरभि गौतम के पिता एक वकील है, जबकि उनकी मां सुशीला गौतम हाई स्कूल के अंतर्गत एक टीचर के रूप में कार्य करती है। सुरभि गौतम आईएएस की पोस्टिंग गुजरात के अहमदाबाद के वीरमगाम जिले में वर्तमान पदस्थापना में सहायक कलेक्टर के रूप में कार्यरत है। सुरभि ने BARC, ISRO, GTE, SAIL, MPPSC, SSC, FCI और दिल्ली पुलिस की परीक्षाओं में भाग लिया और उन सभी को क्रैक किया। कॉलेज में प्लेसमेंट के दौरान सुरभि को टीसीएस कंपनी में नौकरी मिल गई, लेकिन उन्होंने ज्वाइन नहीं किया।
