Success Story in Hindi (Gurdeep Kaur Success Story): पढ़िए एक ऐसी मोटिवेशन कहानी, जो आपको सोचने पर मजबूर कर देगी कि आपके पास कुदरत ने क्या कुछ दिया है तब भी आप शायद उस स्तर पर गंभीर नहीं है, जो किसी प्रतियोगी परीक्षा को पास करने के लिए होना चाहिए। ये कहानी है ‘इंदौर की हेलन केलर’ के रूप में मशहूर 34 वर्षीय गुरदीप कौर वासु की, जो न बोल सकती हैं, न सुन सकती हैं और न देख सकतीं हैं, लेकिन ये शारीरिक बाधाएं उन्हें सरकारी सेवा में आने का सपना देखने से रोक नहीं सकीं। उन्होंने अपनी किस्मत खुद लिखी और सरकारी सेवा कर लाखों उम्मीदवारों के लिए प्रेरणा बन गईं।
गुरदीप कौर वासु की सक्सेस स्टोरी
वाणिज्यिक कर विभाग में मिली नौकरी
गुरदीप का यह सपना सामाजिक, अकादमिक और सरकारी गलियारों से होकर गुजरे उनके लम्बे संघर्ष के बाद आखिरकार पूरा हो गया है। उन्हें प्रदेश के वाणिज्यिक कर विभाग में नियुक्ति मिली है। सामाजिक न्याय कार्यकर्ताओं का दावा है कि यह देश का पहला मामला है, जब बोल, सुन और देख नहीं सकने वाली कोई महिला सरकारी सेवा में आई है।
12 तक पढ़ी हैं गुरदीप
अधिकारियों ने 2 जुलाई को बताया कि कक्षा 12 तक पढ़ी गुरदीप को बहुविकलांगता की श्रेणी में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी के तौर पर इंदौर में वाणिज्यिक कर विभाग के एक दफ्तर में पदस्थ किया गया है। विभाग की अतिरिक्त आयुक्त सपना पंकज सोलंकी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि दिव्यांगजनों के लिए विशेष भर्ती अभियान के तहत गुरदीप का चयन उनकी योग्यता के आधार पर किया गया है।
घर की पहली सदस्य जो सरकारी नौकरी में आई
गुरदीप पूरी लगन से काम सीख रही हैं। वह तय समय पर दफ्तर आती-जाती हैं। जाहिर है कि सरकारी सेवा में आने के लिए उनका सफर आसान नहीं था। गुरदीप की मां मनजीत कौर वासु ने अपनी बेटी की उपलब्धि पर भावुक होते हुए कहा,‘‘गुरदीप मेरे परिवार की पहली सदस्य है जो सरकारी नौकरी में आई है। मुझे कल्पना तक नहीं थी कि वह कभी इस मुकाम तक पहुंचेगी। आजकल लोग मुझे मेरे नाम से कम और गुरदीप की मम्मी के नाम से ज्यादा पहचानते हैं।’’
जटिल समस्या से ग्रस्त हैं गुरदीप
गुरदीप प्रसूति की तय तारीख से पहले पैदा हुई थीं और जटिल समस्याओं के चलते उन्हें जन्म के बाद करीब दो महीने तक एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती रखा गया था। उनकी बेटी पांच महीने की उम्र तक किसी भी बात पर प्रतिक्रिया नहीं दे रही थी जिसके बाद उनके परिवार को पता चला कि वह बोल, सुन और देख नहीं सकती।
ऐतिहासिक और प्रेरक
गुरदीप के सरकारी सेवा में आने के बाद दिव्यांगों के अधिकारों के लिए काम करने वाले लोगों में खुशी का माहौल है। सामाजिक न्याय कार्यकर्ता ज्ञानेंद्र पुरोहित ने कहा, ‘‘यह देश में पहली बार हुआ है, जब बोल, सुन और देख नहीं सकने वाली कोई महिला सरकारी सेवा में आई है। यह समूचे दिव्यांग समुदाय के लिए ऐतिहासिक और प्रेरक पल है।’’ बता दें, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 में अन्य दिव्यांग उम्मीदवारों की तरह अंध-मूक-बधिर लोगों को भी सरकारी नौकरी में आरक्षण दिए जाने का प्रावधान है, लेकिन सरकारी तंत्र को इसके अमल के लिए राजी करना बहुत मुश्किल है।
इस कहानी से पता चलता है कि शारीरिक कमी जिंदगी में कामयाबी की राह नहीं रोक सकती।
(भाषा इनपुट के साथ)
