Why IIT Directs to remove JEE And GATE rank: देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश पाने वाले लाखों छात्रों के लिए JEE और GATE केवल परीक्षाएं नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और संघर्ष का प्रतीक होती हैं। यही वजह है कि इन परीक्षाओं में अच्छी रैंक हासिल करने वाले छात्र अक्सर अपने बायोडाटा (रिज्यूमे) में इसे प्रमुखता से शामिल करते रहे हैं। ऑल आईआईटी प्लेसमेंट कमेटी (AIPC) ने सभी 23 आईआईटी के छात्रों को अपने रिज्यूमे से जेईई रैंक, गेट स्कोर, पर्सेंटाइल और प्रवेश परीक्षाओं से जुड़ी अन्य जानकारी हटाने का निर्देश दिया है। इसके बाद इस विषय पर नई बहस शुरू हो गई है।
IIT प्लेसमेंट कमेटी का मानना है कि नौकरी के लिए उम्मीदवार का चयन उसकी वर्तमान क्षमताओं, तकनीकी कौशल, प्रोजेक्ट्स, रिसर्च और व्यावहारिक अनुभव के आधार पर होना चाहिए, न कि कई वर्ष पहले प्राप्त की गई प्रवेश परीक्षा की रैंक के आधार पर। इस फैसले को लेकर शिक्षाविदों, छात्रों और उद्योग जगत के बीच अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। ये फैसले AIPC की हालिया बैठक में सर्वसम्मति से लिए गए। AIPC सभी 23 आईआईटी की आधिकारिक संस्था है, जो इंटर्नशिप और प्लेसमेंट ड्राइव को लेकर समन्वय स्थापित करती है और दिशा-निर्देश जारी करती है।
इस फैसले के क्या हैं फायदे
IIT जोधपुर से M.Tech कर चुके और वर्तमान में रिलाएंस ग्रुप के साथ रिसर्च साइंटिस्ट नलिन कौशिक का कहना है कि अक्सर कंपनियां रिज्यूमे देखते ही JEE या GATE रैंक से प्रभावित हो जाती हैं। ऐसे में कई बार वे छात्र पीछे छूट जाते हैं जिन्होंने IIT में आकर शानदार CGPA, बेहतरीन प्रोजेक्ट्स या अच्छी इंटर्नशिप की हो, लेकिन एंट्रेंस एग्जाम में उनकी रैंक बहुत खास नहीं रही हो।
इस फैसले के बाद छात्रों का फोकस भी "पुरानी रैंक" से हटकर "मौजूदा स्किल्स" पर जाएगा। अब बातचीत JEE AIR से ज्यादा रियल-लाइफ स्किल्स पर होगी। आज की कंपनियां सिर्फ एग्जाम स्कोर नहीं देखतीं, बल्कि यह देखती हैं कि आप प्रॉब्लम सॉल्व कैसे करते हैं, आपकी कोडिंग कितनी मजबूत है, आपने कौन-से प्रोजेक्ट्स किए हैं, रिसर्च में क्या काम किया है और टीम के साथ कितना अच्छा काम कर सकते हैं। इससे फैसले से उन छात्रों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा जो कॉलेज में लगातार अच्छा प्रदर्शन करते रहे हैं।
नलिन कौशिक, IIT जोधपुर
नलिन कौशिक आगे कहते हैं कि कई छात्र IIT में पहुंचने के बाद भी अपनी पुरानी JEE या GATE रैंक को लेकर परेशान रहते हैं। उन्हें लगता है कि कम रैंक की वजह से उनकी पहचान दूसरों से कम है, जबकि कॉलेज में उनका प्रदर्शन काफी अच्छा होता है। नई व्यवस्था ऐसे छात्रों को एक नया कॉन्फिडेंस दे सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी ने टॉप रैंक हासिल की है तो उसे अपने रिज्यूमे में दिखाने का हक होना चाहिए।
आईआईटी गांधीनगर
इस फैसले के क्या हो सकते हैं नुकसान
IIT दिल्ली के पूर्व छात्र पुनीत भारद्वाज (M.tech) का कहना है कि JEE और GATE जैसी परीक्षाएं देश की सबसे मुश्किल एंट्रेंस एग्जाम्स में गिनी जाती हैं। इनमें अच्छी रैंक लाना आसान नहीं होता, इसके पीछे सालों की मेहनत, कड़ी तैयारी और डिसिप्लिन होता है। ऐसे में अगर किसी ने टॉप रैंक हासिल की है तो उसे अपने रिज्यूमे में दिखाने का हक होना चाहिए। जिन छात्रों ने राष्ट्रीय स्तर पर शानदार रैंक हासिल की है, उन्हें कम से कम ऑप्शनल तौर पर इसका जिक्र करने की अनुमति मिलनी चाहिए।
दूसरी तरफ, कई कंपनियां JEE या GATE रैंक को उम्मीदवार की एनालिटिकल स्किल्स और हाई-प्रेशर माहौल में परफॉर्म करने की क्षमता का एक इंडिकेटर मानती हैं। ऐसे में अगर यह जानकारी रिज्यूमे से हटा दी जाती है तो कंपनियों को शुरुआती स्क्रीनिंग में एक महत्वपूर्ण संकेत नहीं मिल पाएगा।
आईआईटी दिल्ली
फैसले पर क्या कहना है कमेटी का
वहीं, AIPC के संयोजक जॉन जोस इस फैसले को सकारात्मक बदलाव मानते हैं। उनका कहना है कि एंट्रेंस एग्जाम की रैंक सिर्फ एक दिन या एक परीक्षा के प्रदर्शन को दिखाती है, जबकि IIT की डिग्री उन चार-पांच सालों की मेहनत, सीखने की क्षमता और लगातार प्रदर्शन का प्रमाण होती है। इसलिए भर्ती के दौरान उम्मीदवार का मूल्यांकन उसके वर्तमान कौशल, प्रोजेक्ट्स, इंटर्नशिप और उपलब्धियों के आधार पर होना ज्यादा उचित है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो JEE और GATE में अच्छी रैंक हासिल करना निश्चित रूप से बड़ी उपलब्धि है, लेकिन नौकरी के लिए केवल उसी आधार पर किसी उम्मीदवार को आंकना भी सही नहीं माना जा सकता। शायद सबसे बेहतर रास्ता यही है कि कंपनियां कैंडिडेट के मौजूदा स्किल्स और प्रदर्शन को प्राथमिकता दें, जबकि छात्रों को शैक्षणिक उपलब्धियों का जिक्र करने की स्वतंत्रता भी मिले। अब देखने वाली बात होगी कि दूसरे IIT और तकनीकी संस्थान भी इस मॉडल को अपनाते हैं या नहीं।
