Explained Vande Matram History in Hindi: वंदे मातरम् ना केवल एक गीत है बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा है। यह गीत भारत की आजादी की लड़ाई का एक ऐसा नारा बना जिसने करोड़ों भारतीयों को अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ एक कर दिया। यह देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति सम्मान का प्रतीक है। यह ना केवल भारत की राष्ट्रीय पहचान है बल्कि स्थायी प्रतीक भी है। इसे बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने वर्ष 1870 में लिखा था। इसका प्रत्येक शब्द देश के प्रति समर्पण, सम्मान और गर्व की भावना से भरा हुआ है। यह गीत उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ में शामिल है, जो 1872 में प्रकाशित हुआ था।
केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए निर्देश के तहत, अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और कई महत्वपूर्ण आयोजनों में 'वंदे मातरम्' बजना अनिवार्य होगा। सबसे अहम बात यह है कि गीत के पूरे छह छंद बजाए जाएंगे, जिनमें से चार छंद 1937 में कांग्रेस ने हटा दिए थे। सभी लोगों को खड़े होकर इसका सम्मान करना होगा, ठीक वैसे ही जैसे राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समय होता है। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, आदेश में साफ लिखा है कि अगर राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' और राष्ट्रगान 'जन गण मन' साथ में गाए या बजाए जाएं, तो पहले वंदे मातरम गाया जाएगा। यह सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों में लागू होगा। राष्ट्रपति के किसी भी कार्यक्रम में उनके आने-जाने के समय यह गीत बजना जरूरी होगा।
Vande Mataram Full Lyrics: वंदे मातरम लिरिक्स
कहानी वंदे मातरम् की
बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा लिखित वंदे मातरम् में कुल छह छंद हैं। शुरुआती छंद भारत को मां के रूप में चित्रित करते हैं। बाद के छंदों में दुर्गा, कमला (लक्ष्मी) और सरस्वती जैसी हिंदू देवियों का जिक्र है। यह गीत देश में एकता और देशभक्ति और युवाओं में एक नई ऊर्जा का प्रतीक बना हुआ है। यह वही गीत है जिसने ना केवल आजादी की लड़ाई को एक नई दिशा दी थी बल्कि भारतीय भाषाओं के साहित्य को मजबूती भी दी। ऐसे में आइए जानते हैं क्या है वंदे मातरम् का इतिहास।
छंद 1
वन्दे मातरम्।
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्।
शस्यशामलां मातरम्।
शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं।
फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं।
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं।
सुखदां वरदां मातरम्
।।वन्दे मातरम्।।
छंद 2
वन्दे मातरम्।
कोटि-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले।
कोटि-कोटि-भुजैर्धृत-खरकरवाले।
अबला केन मा एत बले।
बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं।
रिपुदलवारिणीं मातरम्
।।वन्दे मातरम्।।
छंद 3
वन्दे मातरम्।
तुमि विद्या, तुमि धर्म।
तुमि हृदि, तुमि मर्म।
त्वं हि प्राणाः शरीरे।
बाहुते तुमि मा शक्ति।
हृदये तुमि मा भक्ति।
तोमारई प्रतिमा गडि।
मन्दिरे-मन्दिरे मातरम्
।।वन्दे मातरम्।।
छंद 4
वन्दे मातरम्।
त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी।
कमला कमलदलविहारिणी।
वाणी विद्यादायिनी।
नमामि त्वाम्।
नमामि कमलां अमलां अतुलां।
सुजलां सुफलां मातरम्।
।वन्दे मातरम्।।
छंद 5
वन्दे मातरम्।
श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषितां।
धरणीं भरणीं मातरम्।
शत्रु-दल-वारिणीं।
मातरम्
।।वन्दे मातरम्।।
छंद 6
वन्दे मातरम्।
त्वं हि शक्ति, त्वं हि शक्ति।
त्वं हि शक्ति मातरम्।
वन्दे मातरम्।।
पहली बार कब और कहां गाया गया वंदे मातरम
बता दें वंदे मातरम गीत पहली बार 1896 में कांग्रेस के अधिवेशन में गाया गया था। यहां वह गीत किसी और ने नहीं बल्कि रवींद्रनाथ टैगोर ने गाया था। महान कवि रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे सुर और ताल दिए और पहली बार राजनीतिक मंच पर गाया। जदुनाथ भट्टाचार्य ने शुरुआती धुन दी, लेकिन रवींद्रनाथ टैगोर ने रागों में ढाला। अंग्रेजों ने इसे बैन करने की कोशिश भी की। बाद में सुभाष चंद्र बोस ने इसे आईएनए का मार्चिंग सॉन्ग बनाया। इसके बाद तो यह गीत आजादी की लड़ाई का नारा बन गया। साल 1905 में बंगाल विभाजन आंदोलन के समय यह गीत पूरे भारत में गूंजने लगा। वहीं आजादी के बाद इस 24 जनवरी 1950 को इस गीत को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया गया।
Vande Mataram History: वंदे मातरम का इतिहास
वंदे मातरम में कितनी बार हुआ बदलाव
कहा जाता है कि वंदे मातरम् पहले तीन से चार पंक्तियों का छोटा सा गीत था। इस गीत में भारत की भूमि को माता कहकर संबोधित किया गया था। यह बंग्ला मिश्रित संस्कृत में लिखा गया था। अरबिंदो घोष ने अंग्रेजी में और आरिफ मोहम्मद खान ने उर्दू में लिखा। वहीं इतिहासकारों की मानें तो उन्होंने वर्ष 1875 में इस गीत में बदलाव व विस्तार किया। इसे गीत का दूसरा संस्करण भी कहा जाता है। गीत का अंतिम रूप (1881-1882) में आनंदमठ में छापा गया।
ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार उन्होंने इस गीत में करीब तीन बार बदलाव किया। पहला संस्ककरण 1872-1873 में, दूसरा संस्करण 1875-76 में जिसमें उन्होंने भारत माता को देवी कहकर संबोधित किया। जबकि अंतिम संस्करण में उन्होंने आनंदमठ में 12 पदों वाला पूर्ण गीत पेश किया।
कौन थे बंकिमचंद्र चटोपाध्याय
भारतीय राष्ट्रगीत की रचना बंकिमचंद्र चटोपाध्याय ने किया था। वह भारत के प्रसिद्ध साहित्यकार, कवि और देशभक्त थे। बंकिमचंद्र अपने समय के सबसे शिक्षित व प्रखर विचारक माने जाते हैं। उनका जन्म 27 जून 1838 को पश्चिम बंगाल के नैहाटी में हुआ। वह स्कूल के दिनों से ही पढ़ने में बहुत तेज थे। कहा जाता है कि महज 14 वर्ष की आयु में पहली बार उन्होंने संवाद प्रभाकर नाम की एक बंगाली पत्रिका में लिखना शुरू कर दिया था।
बंकिमचंद्र चटोपाध्याय ने 1857 में बीए पास की थी। इसके बाद 1869 में कोलकाता के प्रेसिडेंसी कॉलेज से कानून की पढ़ाई की। कानून की पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद उनकी नियुक्ति डिप्टी मजिस्ट्रेट के पद पर हो गई थी। उन्होंने तत्कालीन बंग्ला सरकार में सचिव के पद पर भी कार्य किया। बंकिम बाबू बांग्ला के प्रसिद्ध उपन्यासकार, कवि, गद्यकार और पत्रकार थे।
Vande Mataram Lyrics Meaning in Hindi (वन्दे मातरम सुजलाम सुफलाम गीत का अर्थ)
हे मां, तुम्हें मेरा प्रणाम है। मां तुम पानी से भरी हुई हो, फलों से भरी हुई हो। हे मां तुम्हें मलय से आती हुई हवा शीतलता प्रदान करती है। हे मां तुम फसल से ढकी रहती हो। हे मां, तुम्हें मेरा प्रणाम है। ।।1।।
वो जिसकी रात्रि को चांद की रोशनी शोभायमान करती है, वो जिसकी भूमि खिले हुए फूलों से सुसज्जित पेड़ों से ढकी हुई है। सदैव हंसने वाली, मधुर भाषा बोलने वाली , सुख देने वाली, वरदान देने वाली मां तुम्हें मेरा प्रणाम है। ।।2।।
करोड़ों कंठ मधुर वाणी में तुम्हारी प्रशंसा कर रहे हैं। करोड़ों हाथों में तेरी रक्षा के लिए धारदार तलवारें निकली हुई हैं। मां कौन कहता है कि तुम अबला हो। तुम बल धारण की हुई हो। तुम तारने वाली हो। मां तुम शत्रुओं को समाप्त करने वाली हो। मां तुम्हें मेरा प्रणाम है। ।।3।।
Vande Mataram Meaning: वंदे मातरम का अर्थ
तुम ही विद्या हो, तुम ही धर्म हो। तुम ही हृदय, तुम ही तत्व हो। तुम ही शरीर में स्थित प्राण हो। हमारी बांहों में जो शक्ति है वो तुम ही हो। हृदय में जो भक्ति है वो तुम ही हो। तुम्हारी ही प्रतिमा हर मन्दिर में गड़ी हुई है। मां तुम्हें मेरा प्रणाम है। ।।4।।
तुम ही दस अस्त्र धारण की हुई दुर्गा हो। तुम ही कमल पर आसीन लक्ष्मी हो। तुम वाणी एवं विद्या देने वाली (सरस्वती ) हो, तुम्हें प्रणाम है। तुम धन देने वाली हो, तुम अति पवित्र हो, तुम्हारी कोई तुलना नहीं हो सकती है, तुम जल देने वाली हो, तुम फल देने वाली हो। मां तुम्हें मेरा प्रणाम है। ।।5।।
हे मां तुम श्यामवर्ण वाली,अति सरल,सदैव हंसने वाली हो। तुम धारण करने वाली,पालन-पोषण करने वाली हो। मां तुम्हें मेरा प्रणाम है। ।।6।।
जय हिंद।
