How to Become an IAS without Clearing UPSC Exam: संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से आईएएस, आईपीएस, आईआरएस जैसे पदों पर चयन होता है। प्रशासनिक सेवा में शामिल होने के लिए इस परीक्षा को पास करना होता है। यह परीक्षा देश ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है। ज्यादातर लोगों को यही पता है कि यूपीएससी के अलावा आईएएस अधिकारी बनने का दूसरा तरीका नहीं है, लेकिन ऐसा नहीं है। बता दें, लेटरल एंट्री (Lateral Entry) के जरिये भी आईएएस ऑफिसर बना जा सकता है। आइये जानते हैं इसके बारे में?
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Lateral Entry क्या है?
आईएएस बनने के लिए सामान्य तौर पर UPSC CSE परीक्षा को टॉप नंबरों से पास करना होता है, लेकिन हम इस लेख में आईएएस बनने के दूसरे मार्ग के बारे में जानेंगे, जिसे लेटरल एंट्री कहते हैं। कम लोग ही इसके बारे में जानते हैं। लेटरल एंट्री (Lateral Entry) संघ लोक सेवा आयोग द्वारा एक स्पेशल भर्ती प्रक्रिया है। इसके माध्यम से सरकार निजी क्षेत्र, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) और शैक्षणिक संस्थानों के विशेषज्ञों को सीधे प्रशासनिक पदों पर नियुक्त करती है। इस तरह Lateral Entry के जरिये भी आईएएस अधिकारी बना सकता है।
Lateral Entry की शुरुआत
आधिकारिक तौर पर लेटरल एंट्री स्कीम (LES) नाम की इस पहल को 2018 में शुरू किया गया था, ताकि भारतीय नौकरशाही को फाइनेंशियल, टेक्नोलॉजी और एनर्जी जैसे सेक्टर में विशेषज्ञता, नई दृष्टिकोण और नए अपडेट से जुड़ी जानकारी (Sector-Specific Knowledge) मिल सकें।
Lateral Entry में कार्यकाल कितना होता है?
यूपीएससी लेटरल एंट्री द्वारा होने वाली नियुक्तियां आमतौर पर अनुबंध के आधार पर होती हैं। ये 3 से 5 साल तक के लिए हो सकती हैं। इन भर्तियों के माध्यम से सरकार को विशेषज्ञ मिल पाते हैं, साथ ही प्रशासनिक दक्षता (Administrative Efficiency) में सुधार भी होता है। इसके माध्यम से काम काज में नई एनर्जी आती है।
किस पद पर मिलता है मौका
इस माध्यम से आईएएस संयुक्त सचिव या निदेशक जैसे पदों पर नियुक्त होते हैं। यह पद वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के लिए होते हैं। लेटरल एंट्री सिविल सेवा परीक्षा पास किए बिना आईएएस-स्तर का ओहदा, प्रोटोकॉल, वेतन और भत्ते देती है। लेटरल एंट्री के जरिए नियुक्त एक्सपर्ट सीधे केंद्र सरकार के मंत्रालयों में शीर्ष निर्णय लेने की भूमिकाओं में आ जाते हैं।
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कैसे होता है चयन
Lateral Entry अधिकारियों के लिए चयन प्रक्रिया UPSC द्वारा होने वाली पारंपरिक भर्ती से अलग है। उम्मीदवारों को मुख्य रूप से उनके अनुभव, उपलब्धियों और इंटरव्यू के आधार पर चुना जाता है। भले यहां परीक्षा न होती हो लेकिन इंटरव्यू क्लियर करना जरूरी है।
जानें पदों के बारे में
Lateral Entry के माध्यम से उपलब्ध पद Lateral Entry के तहत, विशेषज्ञों को केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में वरिष्ठ प्रशासनिक पदों के लिए सीधे भर्ती किया जाता है, जिनमें शामिल हैं:
संयुक्त सचिव: सबसे वरिष्ठ पदों में से एक, जिसके लिए आमतौर पर आईएएस अधिकारियों के लिए 17-20 साल की सेवा की आवश्यकता होती है।
निदेशक: मध्य-वरिष्ठ स्तर की भूमिकाएं जो विशिष्ट नीति क्षेत्रों के लिए जिम्मेदार होती हैं, सीधे एक संयुक्त सचिव को रिपोर्ट करती हैं।
उप सचिव: भूमिकाएं जो प्रशासनिक और नीति-निर्माण कार्यों के समन्वय में सहायता करती हैं।
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पात्रता के बारे में
Lateral Entry के लिए पात्रता चुने जाने वाले व्यक्ति के कार्य अनुभव और पेशेवर ट्रैक रिकॉर्ड पर आधारित होता है:
शैक्षिक योग्यता: संबंधित क्षेत्र में ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन होना चाहिए
कार्य अनुभव: प्राइवेट सेक्टर, पीएसयू या अन्य संगठनों में संबंधित डोमेन में कम से कम 10 से 15 वर्ष जरूरी है।
आयु सीमा: आमतौर पर 40 से 55 वर्ष, लेकिन विज्ञापन के आधार पर इनमें भिन्नता हो सकती है।
शॉर्टलिस्टिंग: उम्मीदवारों को शुरू में उनके आवेदनों, पेशेवर उपलब्धियों और अनुभव के आधार पर शॉर्टलिस्ट किया जाता है।
साक्षात्कार: अंतिम चयन पूरी तरह से यूपीएससी के उच्च-स्तरीय साक्षात्कार में उम्मीदवार के प्रदर्शन पर निर्भर करता है।
आरक्षण: Lateral Entry पदों को अक्सर "एकल-पद" संवर्ग माना जाता है, इसलिए एससी/ एसटी/ ओबीसी/ ईडब्ल्यूएस के लिए पारंपरिक आरक्षण नीतियां लागू नहीं होती हैं। इसने इस योजना को विवादास्पद बना दिया है, जिससे राजनीतिक और सामाजिक आलोचना हुई।
लेटेरल एंट्री आसान भाषा में
सीधे शब्दों में कहें तो सरकार उन व्यक्तियों को सीधे आईएएस बनाती है जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों - जैसे रक्षा सेवा, वैज्ञानिक अनुसंधान या टेक्नोलॉजी में उत्कृष्ट योगदान दिया हो। ये नियुक्तियां किसी मानक परीक्षा के माध्यम से नहीं होतीं हैं, इसलिए इनके बारे में कम लोगों को पता होता है। ये नियुक्तियां उम्मीदवार की विशेषज्ञता के आधार पर 3 से 5 साल के अनुबंध पर होती हैं।
