CBSE New Guidelines for 10th and 12th Board Exams: केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Education) भारत की स्कूली शिक्षा का एक प्रमुख बोर्ड है। भारत के अन्दर और बाहर के बहुत से निजी विद्यालय इससे सम्बद्ध हैं। सीबीएसई का प्रमुख उद्देश्य शिक्षण संस्थानों को अधिक प्रभावशाली ढंग से संचालित करना, विद्यार्थियों की शैक्षिक आवश्यकताओं के प्रति उत्तरदायी होना है। सीबीएसई बोर्ड पहली कक्षा से लेकर 12वीं कक्षा तक के लिये पाठ्यक्रम तैयार करता है और वर्ष में दो मुख्य परीक्षाएं संचालित करता है जिसमें 10वीं कक्षा के लिये अखिल भारतीय सेकेण्डरी स्कूल परीक्षा (AISSE) एवं 12वीं कक्षा के लिये अखिल भारतीय सिनीयर स्कूल सर्टिफिकेट परीक्षा (AISSCE) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त अखिल भारतीय इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा (AIEEE) और अखिल भारतीय प्री-मेडिकल परीक्षा (AIPMT) का भी संचालन करता था।
सीबीएसई का 2 साल वाला नियम क्या है
हाल ही में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र-छात्राओं के लिए अपने नियमों में बदलाव किया गया है। ये नियम अंतराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किए गए हैं और स्कूली शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार लाने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 10वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं के लिए नये नियम जारी किए हैं। आइये जानते हैं कौन दे सकेगा सीबीएसई 10वीं 12वीं परीक्षा, एडिश्नल विषय, इंटरनल असेसमेंट और हाजिरी के लिए कौन से नियम तय किए गए हैं।
CBSE RULES: सीबीएसई की नई गाइडलाइन
CBSE New Rules and Guidelines: सीबीएसई के नए नियम क्या हैं
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 15 सितंबर 2025 को नये नियमों को लेकर नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में कुल 7 प्वाइंट्स दिए गए हैं। CBSE ने घोषणा की है कि 2026 से कक्षा 10 व 12 की बोर्ड परीक्षाओं में बैठने हेतु कुछ नए अनिवार्य नियम लागू होंगे। ये नए नियम अलग अलग प्वाइंट्स में समझना जरूरी है ताकि 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा में बैठने वाले छात्रों को समस्या का सामना ना करना पड़े। । इन नियमों के अंतर्गत छात्रों की कम से कम 75 प्रतिशत स्कूल उपस्थिति (Attendance) और पूरे दो वर्षों में होने वाले आंतरिक मूल्यांकन (internal assessment) को अनिवार्य किया गया है।
CBSE New Exam Guidelines: सीबीएसई के 7 प्वाइंट्स
सीबीएसई का यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) की दिशा में एक कदम माना जा रहा है, जिसमें नियमित उपस्थिति, निरंतर मूल्यांकन और योग्यता-आधारित शिक्षा पर बल दिया गया है। इससे छात्रों में नियमित अध्ययन एवं पठन-पाठन के प्रति अनुशासन बढ़ेगा।परीक्षा के लिए सिर्फ पाठ्यक्रम जानना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि स्कूल में नियमित आना जरूरी है। नये नियम के अनुसार, स्कूलों को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि वे उपस्थिति रिकॉर्ड करें और आंतरिक मूल्यांकन यानी इंटरनल असेसमेंट समय पर करें।
10वीं, 12वीं दो साल की पढ़ाई है
क्लास 10 और 12 दो साल के प्रोग्राम्स हैं। 10th क्लास में 9वीं और 10वीं होते हैं, 12th में 11वीं और 12वीं होते हैं। इस अनुसार, स्टूडेंट्स किसी भी बोर्ड परीक्षा में शामिल तभी हो सकते हैं जब उन्होंने सभी विषयों की पढ़ाई उस पूरे दो साल की हो।
75% अटेंडेंस जरूरी
जो छात्र 2026 में 10वीं या 12वीं बोर्ड परीक्षा देंगे, उन्हें न्यूनतम 75% स्कूल अटेंडेंस अनिवार्य रूप से पूरी करनी होगी। यदि यह उपस्थिति पूरी नहीं होगी, तो परीक्षा में बैठने की अनुमति मिलने में समस्या हो सकती है।
इंटरनल असेसमेंट
75 अटेंडेंस सीधे इंटरनल असेसमेंट से जुड़ी होगी। इंटरनल असेसमेंट सिर्फ एक या दो परीक्षाओं का नहीं होगा, बल्कि पूरे दो वर्षों की पढ़ाई, क्लासवर्क, प्रोजेक्ट आदि को मिलाकर किया जाएगा।
सीबीएसई के नए नियम
पाठ्यक्रम की अवधि का ब्लॉक
CBSE ने यह स्पष्ट किया है कि कक्षा 9-10 को एक ब्लॉक माना जाएगा और कक्षा 11-12 को दूसरा ब्लॉक। इसका मतलब है कि पूरे ब्लॉक-समय में रेगुलर अटेंडेंस और इंटरनल एक्टिविटीज में शामिल होना जरूरी होगा।
कम्पार्टमेंट / रिपीट परीक्षा नियम
यदि किसी छात्र को किसी विषय में कंपार्टमेंट देनी है, तो भी उसकी 75 प्रतिशत अटेंडेंस और इंटरनल मार्क्स पूरे होने चाहिए। अधूरे आंतरिक मूल्यांकन या उपस्थिति की वजह से किसी विषय में छात्र को अतिरिक्त विषय की परीक्षा देते समय “प्राइवेट कैंडिडेट” माना जाएगा।
एडिशनल सब्जेक्ट
सीबीएसई 10वीं कक्षा में छात्र छात्राओं को दो एडिशनल सब्जेक्ट्स ऑफर करता है (5 मेन और कंपल्सरी सब्जेक्ट्स के अलावा)। जबकि सीबीएसई 12वीं में एक एडिशनल सब्जेक्ट ऑफर होता है। विद्यार्थियों को दो साल तक एडिशनल सब्जेक्ट की पढ़ाई करनी होगी।
स्कूलों और सब्जेक्ट के नियम
अगर किसी स्कूल ने किसी विषय के लिए सीबीएसई बोर्ड अनुमति नहीं ली है, उसके पास उस विषय के लिए टीचर, लैब, अन्य सुविधाएं नहीं हैं, तो उसके स्टूडेंट्स को उस सब्जेक्ट को पढ़ने की अनुमति नहीं होगी।
नियम की बाध्यता
सीबीएसई ने स्पष्ट किया कि जो छात्र छात्राएं ऊपर बताई गई शर्तें पूरी नहीं कर पाएंगे, वो प्राइवेट स्टूडेंट के तौर पर भी एडिशनल सब्जेक्ट्स के लिए सीबीएसई बोर्ड एग्जाम नहीं दे पाएंगे।
