Most Underrated Engineering Branch: जब भी कोई छात्र इंजीनियरिंग करने की सोचता है, तो उसके दिमाग में सबसे पहले कंप्यूटर साइंस, आईटी, मैकेनिकल या सिविल इंजीनियरिंग जैसी पारंपरिक ब्रांचों या डेटा साइंस और एआई एंड मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक इंजीनियरिंग ब्रांच का नाम आता है। अधिकांश छात्र और अभिभावक इन्हीं प्रचलित ब्रांचों के पीछे भागते हैं, जिससे इनमें मुकाबला बहुत कठिन हो जाता है।
Most Underrated Engineering Branch (Photo -AI)
हालांकि, इंजीनियरिंग क्षेत्र में एक ऐसी ब्रांच भी है जिसे अक्सर छात्र नजरअंदाज कर देते हैं या इसे 'अंडररेटेड' माना जाता है, लेकिन करियर और सैलरी के मामले में यह बड़े-बड़े कंप्यूटर साइंस इंजीनियरों को कड़ी टक्कर देती है। हम बात कर रहे हैं पेट्रोलियम इंजीनियरिंग (Petroleum Engineering) और माइनिंग इंजीनियरिंग (Mining Engineering) जैसी स्पेशलाइज्ड ब्रांचों के बारे में। भले ही यह दोनों ब्रांच सबसे अंडररेटेड हैं, लेकिन सैलरी इसमें भी लाखों की है और एक सेट करियर भी।
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क्यों मानी जाती है यह सबसे अंडररेटेड ब्रांच?
कंप्यूटर साइंस या आईटी के मुकाबले इन ब्रांचों में दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या काफी कम होती है। इसका मुख्य कारण यह है कि लोगों को लगता है कि इनमें काम केवल फील्ड पर ही होता है और इनमें अवसर सीमित हैं। लेकिन सच्चाई इसके बिल्कुल अलग है। कम सीटें और कम छात्र होने की वजह से इस क्षेत्र में कॉम्पटीशन बेहद कम है, जबकि देश-विदेश में कुशल इंजीनियरों की मांग हमेशा बहुत अधिक है।
पेट्रोलियम और माइनिंग इंजीनियरिंग में क्या होता है काम?
पेट्रोलियम इंजीनियर का मुख्य कार्य जमीन और समुद्र के नीचे से कच्चे तेल (Crude Oil) और प्राकृतिक गैस को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने की तकनीक डिजाइन करना और निष्कर्षण प्रक्रिया की निगरानी करना होता है। जबकि माइनिंग इंजीनियर जमीन के अंदर मौजूद खनिजों (जैसे कोयला, सोना, लोहा, तांबा आदि) को निकालने के लिए सुरक्षित खदानों की योजना बनाने और उनके प्रबंधन का काम करते हैं।
क्यों मिलती है लाखों की सैलरी?
इन ब्रांचों को इंजीनियरिंग की सबसे ज्यादा सैलरी देने वाली शाखाओं में गिना जाता है। इसकी मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:
जोखिम और विशेषज्ञता: तेल और खदानों के क्षेत्र में काम करना जोखिम भरा और अत्यधिक तकनीकी होता है। इसलिए कंपनियां अपने इंजीनियरों को विशेष जोखिम भत्ता और भारी-भरकम पैकेज देते हैं।
अंतरराष्ट्रीय अवसर: मिडिल ईस्ट जैसे संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, सऊदी अरब के अलावा अमेरिका और रूस में पेट्रोलियम इंजीनियरों की भारी मांग रहती है। यहां शुरुआत में ही लाखों रुपये प्रति माह का सैलरी पैकेज मिल जाता है।
कम सप्लाई, ज्यादा डिमांड: हर साल देश में आईटी के लाखों छात्र निकलते हैं, लेकिन पेट्रोलियम या माइनिंग इंजीनियर सीमित संख्या में ही तैयार होते हैं। कम सप्लाई लेकिन जॉब सेक्टर में अधिक डिमांड होने के कारण टेक और एनर्जी कंपनियां मनचाही सैलरी देकर इन्हें हायर करती हैं।
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शुरुआती सैलरी पैकेज कितना होता है?
अगर भारत में इनके सैलरी पैकेज के बारे में बात करें तो आईआईटी (IITs) या एनआईटी (NITs) जैसे शीर्ष संस्थानों से पास आउट होने वाले नए पेट्रोलियम/माइनिंग इंजीनियरों को 8 लाख से 20 लाख रुपये प्रति वर्ष तक का शुरुआती पैकेज आसानी से मिल जाता है। वहीं अगर हम विदेश में करियर के अवसर और सैलरी की बात करें तो अगर आपको किसी बहुराष्ट्रीय (MNC) या गल्फ कंट्री की एनर्जी कंपनी में प्लेसमेंट मिल जाता है, तो शुरुआती पैकेज 30 लाख से 50 लाख रुपये प्रति वर्ष या उससे भी अधिक हो सकता है।
इनके टॉप रिक्रूटर्स
इन इंजीनियरों को देश और दुनिया की शीर्ष सार्वजनिक (PSU) और निजी कंपनियां हायर करती हैं। अगर हम सरकारी कंपनियों की बात करें तो ONGC, OIL India, IOCL, GAIL, कोल इंडिया लिमिटेड का नाम सामने आता है। वहीं अगर बात प्राइवेट व ग्लोब कंपनियों की हो तो रिलायंस इंडस्ट्रीज, श्लमबर्गर, हैलिबर्टन, शेल, शेवरॉन, वेदांता। इन सभी कंपनियों में आप अच्छे-खासे पैकेज पर नौकरी प्राप्त कर करियर और लाइफ सेट कर सकते हैं।
