NEET 2026: NEET UG री-एग्जाम की तैयारियों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। बैठक के बाद उन्होंने कहा कि संभावित साइबर खतरों को देखते हुए NTA पूरी तरह सतर्क है और परीक्षा को निष्पक्ष एवं सुरक्षित तरीके से आयोजित कराने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि पेपर लीक विवाद के बाद NEET UG री-एग्जाम को लेकर सरकार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। इसी कारण परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था को पहले से कहीं अधिक मजबूत बनाया गया है। शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण एग्जाम को पूरी निष्पक्षता और विश्वसनीयता के साथ संपन्न कराना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार का दावा है कि इस बार परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष निगरानी, तकनीकी सुरक्षा उपायों और विभिन्न एजेंसियों के समन्वय पर जोर दिया जा रहा है।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "पहले भी कई चुनौतियां रही हैं और अभी भी एक चुनौती है। भारत सरकार का पूरा तंत्र इसमें लगा हुआ है; कैबिनेट सचिव और गृह सचिव भी शामिल हैं। मैंने आज गृह मंत्री और रक्षा मंत्री से मुलाकात की है और आज शाम स्वास्थ्य मंत्री से भी मिलूंगा। राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र भी इस पर कड़ी नज़र रखे हुए है। पूरा वरिष्ठ नेतृत्व स्थिति पर नज़र बनाए हुए है। हमें सभी का सहयोग मिल रहा है; मुझे पूरा भरोसा है कि सभी राज्यों के मुख्यमंत्री इस मामले में सहयोग करेंगे।"
धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना को खत्म करने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर व्यापक तैयारियां की गई हैं। विभिन्न राज्यों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है, खासकर उन राज्यों और क्षेत्रों पर विशेष नजर रखी जा रही है जहां सुरक्षा और साइबर जोखिम अधिक होने की आशंका है।
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शिक्षा मंत्री ने कहा कि NEET UG परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि गड़बड़ी कब, कहां और किस स्तर पर हुई। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच हो ताकि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी बताया कि सरकार ने NTA से कानूनी विकल्पों पर विचार करने को कहा है। उन्होंने कहा कि एजेंसी यह जांच रही है कि दोषी व्यक्तियों या संस्थाओं के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई के साथ-साथ सिविल लाइबिलिटी (नागरिक दायित्व) के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है या नहीं। इस संबंध में NTA कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ले रही है।
