150 रुपये से DUSU तक का सफर, 8 दशक में कैसे बदली छात्र राजनीति?

DUSU History In Hindi: दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन आज देश की छात्र राजनीति के सबसे चर्चित मंचों में अपनी जगह बना चुका है। आज डूसू का नाम आते ही विश्वविद्यालय परिसर की राजनीति, छात्र मुद्दे और चुनावी गतिविधियां चर्चा में आ जाती हैं। ऐसे में यहां हम आपके लिए डूसी का इतिहास लेकर आए हैं।

DUSU History In Hindi: महज 150 रुपये के अनुदान से शुरू हुआ दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) लगभग आठ दशक बाद देश की छात्र राजनीति के सबसे चर्चित केंद्रों में से एक बन चुका है। इसके गठन का इतिहास उसके लंबे सफर की झलक पेश करता है।

DUSU History In Hindi

DUSU History In Hindi: 150 रुपये से DUSU तक का सफर

बता दें डूसू का सफर देश की आजादी से कुछ ही दिन पहले छह अगस्त 1947 से उस समय शुरू हुआ था जब विश्वविद्यालय के कुलपति ने कार्यकारी परिषद को बताया था कि, विद्यार्थियों का एक प्रतिनिधि निकाय विश्वविद्यालय छात्र संघ की स्थापना करना चाहता है। परिषद ने इस प्रस्ताव पर सैद्धांतिक रूप से सहमति जताते हुए कहा था कि, एक समिति इसके लिए आवश्यक संविधान और प्रक्रिया का मसौदा तैयार करेगी। इसके साथ ही छात्र संघ का औपचारिक रूप से गठन होने के बाद शुरुआती खर्च के लिए 150 रुपये का छोटा-सा अनुदान देने का प्रस्ताव रखा गया।

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