CBSE 12वीं के परीक्षा परिणाम और री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया को लेकर दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई। छात्र संगठन NSUI ने इस मामले में याचिका दायर की थी जिसमें CBSE के री-इवैल्यूएशन पोर्टल को दोबारा खोलने की मांग की गई थी ताकि वे छात्र भी आवेदन कर सकें जो निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन नहीं कर पाए। NSUI ने अदालत से अनुरोध किया कि छात्रों को कम से कम चार दिन का अतिरिक्त समय दिया जाए। संगठन ने दलील दी कि कई मामलों में री-इवैल्यूएशन के बाद छात्रों के अंकों में बड़ा बदलाव संभव है। उदाहरण के तौर पर किसी छात्र के 70 प्रतिशत अंक बढ़कर 90 प्रतिशत तक हो सकते हैं, जिससे उसे विश्वविद्यालयों में प्रवेश का अवसर मिल सकता है।
CBSE रीचेकिंग मामले पर HC की सुनवाई
सुनवाई के दौरान NSUI ने कोर्ट को बताया कि बड़ी संख्या में छात्र अभी भी अपनी उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन (री-इवैल्यूएशन) के लिए आवेदन करना चाहते हैं। संगठन का दावा था कि एक लाख से अधिक छात्र ऐसे हैं जो इस प्रक्रिया में शामिल होना चाहते हैं। वहीं केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह याचिका केवल अनुमान के आधार पर दायर की गई है। उन्होंने कहा कि ऐसे किसी भी आदेश का प्रभाव लाखों छात्रों के हितों पर पड़ सकता है। तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि CBSE ने री-इवैल्यूएशन के लिए छात्रों को पर्याप्त अवसर दिया था। बोर्ड ने पहले 19 मई से 25 मई तक और उसके बाद 2 जून से 7 जून तक री-इवैल्यूएशन पोर्टल खोला था।
CBSE ने क्या कहा
CBSE की ओर से भी अदालत को बताया गया कि किसी नए निर्देश से करीब 17.8 लाख छात्रों के परिणामों और आगे की प्रक्रियाओं पर असर पड़ सकता है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि जिन छात्रों ने निर्धारित समय के भीतर आवेदन नहीं किया, उनके लिए फिलहाल पोर्टल पर दोबारा आवेदन की कोई व्यवस्था नहीं है। बोर्ड के अनुसार लगभग 1.67 लाख छात्र पहले ही री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर चुके हैं और इस स्तर पर नए आवेदन स्वीकार करना व्यावहारिक नहीं होगा।
एडमिशन प्रक्रिया होगी प्रभावित
सॉलिसिटर जनरल ने यह भी बताया कि अब तक लगभग 3.8 लाख उत्तर पुस्तिकाएं री-इवैल्यूएशन के लिए जमा की जा चुकी हैं। उनके अनुसार लाखों छात्रों के कॉलेज एडमिशन और काउंसलिंग की प्रक्रिया पहले से जारी है। यदि इस चरण पर पोर्टल दोबारा खोला जाता है तो पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और छात्रों के प्रवेश में अनावश्यक देरी हो सकती है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फिलहाल री-इवैल्यूएशन पोर्टल दोबारा खोलने की मांग पर कोई आदेश देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी छात्र या अभिभावक को कोई विशेष शिकायत है तो वह सीधे CBSE से संपर्क कर सकता है या अलग से अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है। अदालत ने कहा कि वह इस समय मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहती। फिलहाल अदालत ने मामले की सुनवाई टाल दी है।
