केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा कक्षा 12वीं के परीक्षा नतीजे घोषित होने के बाद से ही इस साल का शैक्षणिक सत्र विवादों के घेरे में रहा है। पोस्ट-रिजल्ट सेवाएं यानी वेरिफिकेशन और रिवैल्यूएशन प्रक्रिया में सर्वर डाउन, धुंधली आंसर कॉपियों की स्कैन कॉपी, पेमेंट फेल्ड जैसी कई तकनीकी खामियों के साथ ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम' (OSM) पर खड़े हुए सवालों और कोर्ट के मुकदमों के बीच केंद्र सरकार को बोर्ड में शीर्ष स्तर पर एक बड़ा फेरबदल तक करना पड़ा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि 12वीं के रिजल्ट के बाद से शुरू हुए इस विवाद (CBSE Row) की टाइमलाइन क्या है। कब-कब,क्या-क्या हुआ है।
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कब जारी हुआ था सीबीएसई 12वीं रिजल्ट
सीबीएसई कक्षा 12वीं के रिजल्ट की घोषणा बोर्ड द्वारा 13 मई 2026 को की गई थी। उसके बाद रिवैल्यूएशन प्रक्रिया को शुरू करने के लिए बोर्ड ने स्कैन आंसर कॉपियों के लिए आवेदन प्रक्रिया 19 मई से शुरू की और यहीं से शुरुआत हुई सीबीएसई विवाद की। स्कैन कॉपियों के लिए शुरू किया गए पोर्टल में इतनी तकनीकी खामियां थी छात्रों को आवेदन करने में कई परेशानी का सामना करना पड़ा।
वेबसाइट से कई बार Apply Now का सेक्शन हटाया और एड किया गया है। सर्वर डाउन रहा है। किसी तरह छात्रों ने आवेदन करना शुरू किया तो पेमेंट फेल्ड, डेवल पेमेंट, फीस से 8 गुना अधिक शुल्क स्क्रीन पर आने जैसी समस्याएं उत्पन्न होने लगी। यह मामला यहां ही नहीं खत्म हुआ।
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धुंधली कॉपियों, मिसिंग शीट, गलत आंसर कॉपी ने बढ़ाई मुसिबत
तकनीकी खामियों को झेलने के बाद विवाद खत्म नहीं हुआ, बल्कि और बढ़ने लगा। कई छात्रों को धुंधली स्कैन कॉपियों प्राप्त हुई तो कई छात्रों की सप्लीमेंट्री शीट गायब मिली। कहीं सही उत्तर पर भी कम अंक मिले तो कहीं सही उत्तर पर जीरो मार्क्स देकर छोड़ दिया गया है। हैरान करने वाली बात तो तब सामने आई, जब कई छात्रों ने सोशल मीडिया का सहारा लेते हुए बताया कि उन्हें प्राप्त आंसर कॉपी का पहला पन्ना उनका है, लेकिन आंसर कॉपी उनकी नहीं है। हैंडराइटिंग सेम नहीं न होने पर छात्रों के साथ अभिभावकों की चिंता और बढ़ गई। इस तरह का शिकायतों के सामने आते ही सबसे पहले सवाल उठा सीबीएसई के नए ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम पर।
क्या है ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) विवाद?
इस साल सीबीएसई ने कक्षा 12वीं कि कॉपियों के मूल्यांकन के लिए नया ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम पेश किया था। परीक्षा परिणाम आने के बाद कई छात्रों ने आरोप लगाया कि बोर्ड द्वारा अपलोड की गई स्कैन की गई आंसर कॉपियों में उनकी लिखावट उनकी मूल लिखावट से मेल नहीं खा रही थी। इसके अलावा, साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं और छात्रों ने इस डिजिटल पोर्टल की सुरक्षा और टेंडर प्रक्रिया में कमियों को उजागर किया और देखते ही देखते इसने एक बड़े विवाद का रूप ले लिया। कई अभिभावकों और छात्रों का कहना है कि इस ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के कारण उन्हें 20 से 40 अंकों का नुकसान हुआ है।
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रातों-रात हटाए गए चेयरमैन और सेक्रेटरी
सीबीएसई स्कैन कॉपी, ओएसएम और रिवैल्यूएशन विवाद और तकनीकी गड़बड़ियों के चलते बोर्ड की साख पर उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने एक कड़ा कदम उठाया और बोर्ड में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला। केंद्र सरकार ने विवादों के बीच चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता को पद से हटा दिया। इस फैसले के बाद राहुल सिंह की जगह वरिष्ठ आईएएस अधिकारी लोखंडे प्रशांत सीताराम (Lokhande Prashant Sitaram) को सीबीएसई का नया चेयरमैन बनाया गया और सचिव के पद पर वरुण भारद्वाज को नियुक्त किया गया। साथ ही, ओएसएम सेवा खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए एक-सदस्यीय विशेष टीम का गठन किया गया, जिसकी अध्यक्षता क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान द्वारा की जा रही है।
कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन और 'Roll Number Not Found' एरर
स्कैन कॉपियों की तकनीकी खामियों को झेलने के बाद अपने अंकों से असंतुष्ट छात्र जब 2 जून से 7 जून के बीच के रिवैल्यूएशन के लिए आवेदन करने पहुंचे तो उन्हें एक बार फिर पोर्टल पर टेक्निकल ग्लिच का सामना करना पड़ा। कई छात्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का सहारा लेकर इस परेशानी को सामने रखा। बड़ी संख्या में छात्रों ने बताया कि रिवैल्यूएशन के लिए आवेदन करने के दौरान उन्होंने "Roll Number Not Found" का एरर मेसेज दिखाई दिया।
सीबीएसई ने अपना स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि यह कोई तकनीकी खराबी नहीं थी, बल्कि नियम के तहत जिन उम्मीदवारों ने पहले चरण यानी स्कैन कॉपियों के लिए आवेदन किया था, केवल वही उम्मीदवार अगले चरण यानी रिवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। जिन उम्मीदवारों ने स्कैन कॉपियों के लिए आवेदन नहीं किया है वह रिवैल्यूएशन के लिए आवेदन नहीं कर सकते।
गल्फ देशों के कई छात्रों की मार्कशीट खाली
सीबीएसई की विवाद केवल देश सिमित नहीं रहा, बल्कि विदेशी केंद्रों तक पहुंच गया। मिडिल ईस्ट (खाड़ी देशों) में तनावपूर्ण स्थिति के कारण सीबीएसई द्वारा कुछ विषयों की परीक्षाओं को रद्द किया गया था और इस स्थिति को देखते हुए स्पेशल इवैल्यूएशन सिस्टम के तहत छात्रों का रिजल्ट तैयार किया गया था, लेकिन इस दौरान कक्षा 12वीं के लिए इंप्रूवमेंट परीक्षाओं के लिए आवेदन करने वाले छात्रों की मार्कशीट खाली यानी ब्लैंक जारी करने की बात सामने आई।
सऊदी अरब में रहने वाले एक भारतीय छात्र प्रणसू पटेल नाम के एक छात्र ने एडवोकेट विनीत जिंदल की मदद से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की और मार्कशीट सही तरह से जारी करने या फिर रद्द हुई परीक्षाओं का फिर से आयोजन करने की मांग की। छात्र ने बताया कि उसने कुछ परीक्षाएं दी थी और कुछ परीक्षाएं रद्द हो गई थी। जिस प्रकार अन्य छात्रों को स्पेशल इवैल्यूएशन का लाभ मिला है, उस प्रकार उन्हें भी मिलना चाहिए। सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
