CBSE Class 12 का रिजल्ट आने के बाद कई छात्र खुश हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें लग रहा है कि उनकी मेहनत के हिसाब से नंबर नहीं मिले। अगर आपको भी लगता है कि आपके मार्क्स उम्मीद से कम आए हैं, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। CBSE छात्रों को अपनी कॉपी दोबारा देखने और नंबरों की जांच कराने का मौका देता है। बोर्ड ने 2025-26 सत्र के लिए Post Result Facilities शुरू कर दी हैं। इस बार CBSE ने कॉपियों की जांच के लिए “ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम” का इस्तेमाल किया, यानी एग्जामिनर ने कॉपी कंप्यूटर स्क्रीन पर चेक की। इसके बावजूद अगर किसी छात्र को मूल्यांकन में गलती लगती है, तो वह री-चेकिंग और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकता है।
CBSE ने पूरी प्रक्रिया को अलग-अलग स्टेज में बांटा है। अगर आप आगे री-इवैल्यूएशन करवाना चाहते हैं, तो पहले कुछ जरूरी स्टेप पूरे करने होंगे।
री-इवैल्यूएशन से पहले जान लें जरूरी बातें
1. पहले स्कैन कॉपी मंगानी होगी
अगर आप किसी सवाल के नंबर को चुनौती देना चाहते हैं, तो सबसे पहले उस विषय की कॉपी को डाउनलोड करें।
2. सभी विषय एक साथ चुनें
अगर आप एक से ज्यादा विषयों में आवेदन करना चाहते हैं, तो सभी सब्जेक्ट्स एक ही बार में चुनने होंगे। फॉर्म जमा करने के बाद नया विषय जोड़ने का मौका नहीं मिलेगा।
3. नंबर बढ़ भी सकते हैं और घट भी
री-इवैल्यूएशन के दौरान एग्जामिनर कॉपी दोबारा चेक करता है। ऐसे में नंबर बढ़ सकते हैं, लेकिन कम भी हो सकते हैं। अगर अंक कम हो जाते हैं, तो वही अंतिम माने जाएंगे और पुराना रिजल्ट रद्द हो जाएगा।
4. फीस केवल ऑनलाइन जमा होगी
भुगतान सिर्फ ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकता है। छात्र डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऑफलाइन भुगतान स्वीकार नहीं होगा।
स्कैन कॉपी डाउनलोड करने के बाद क्या करें?
CBSE उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी देखने के लिए फीस लेता है। कॉपी डाउनलोड करने के बाद इन बातों को ध्यान से जांचें:
- रोल नंबर और नाम सही है या नहीं
- सभी पेज स्कैन हुए हैं या कोई पेज छूटा तो नहीं
- अतिरिक्त शीट या ग्राफ साफ दिखाई दे रहे हैं या नहीं
- दिए गए उत्तरों का मिलान CBSE की मार्किंग स्कीम से करें
अगर आपको लगता है कि किसी सवाल में सही उत्तर होने के बावजूद कम अंक दिए गए हैं, तो उस प्रश्न का नंबर नोट कर लें।
मार्किंग स्कीम क्यों है जरूरी?
CBSE हर विषय की आधिकारिक मार्किंग स्कीम जारी करता है। इसमें बताया जाता है कि किस जवाब पर कितने नंबर मिलने चाहिए। छात्र अपनी कॉपी को इस स्कीम से मिलाकर समझ सकते हैं कि कहां गलती हुई है।
आवेदन करते समय रखें ध्यान
- आवेदन की तारीख मिस न करें
- वेबसाइट पर सही जानकारी भरें
- फीस जमा होने के बाद रसीद संभालकर रखें
- मोबाइल नंबर और ईमेल एक्टिव रखें
- छात्रों के लिए जरूरी सलाह
री-इवैल्यूएशन तभी करवाएं जब आपको पूरा भरोसा हो कि मूल्यांकन में गलती हुई है। सिर्फ अनुमान के आधार पर आवेदन करने से नुकसान भी हो सकता है। कई बार छात्रों के नंबर कम भी हो जाते हैं। इसलिए पहले स्कैन कॉपी और मार्किंग स्कीम को अच्छी तरह समझ लें, फिर फैसला करें।
