पीएचडी में दाखिला लेने की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का एक अहम फैसला सामने आया है। कोर्ट ने साफ किया है कि अगर कोई विश्वविद्यालय पीएचडी में एडमिशन के लिए UGC NET को जरूरी योग्यता मानता है, तो उसे Joint Entrance Screening Test (JEST) का स्कोर स्वीकार करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। हर विश्वविद्यालय अपने तय एडमिशन नियमों के आधार पर उम्मीदवारों की पात्रता निर्धारित कर सकता है।
Allahabad High Court का फैसला, PhD एडमिशन के लिए UGC NET की जगह नहीं चलेगा JEST
यह मामला लखनऊ की डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में फिजिक्स विषय के पीएचडी एडमिशन से जुड़ा है। एक याचिकाकर्ता ने उस्मानिया विश्वविद्यालय से एस्ट्रोनॉमी में MSc किया है। उनका कहना था कि JEST स्कोर होने के बावजूद विश्वविद्यालय ने उन्हें शैक्षणिक सत्र 2025-26 में पीएचडी इंटरव्यू के लिए नहीं बुलाया, क्योंकि उनके पास UGC NET स्कोर नहीं था।
उन्होंने कोर्ट से मांग की थी कि विश्वविद्यालय को उन्हें इंटरव्यू में शामिल करने का निर्देश दिया जाए। साथ ही उन्होंने कम से कम एक लाख रुपये के मुआवजे और कानूनी खर्च की मांग भी की।
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विश्वविद्यालय ने क्या दलील दी?
विश्वविद्यालय ने कोर्ट को बताया कि 26 अक्टूबर 2024 को लिए गए फैसले के तहत पीएचडी एडमिशन के लिए UGC NET को पात्रता की शर्त बनाया गया था। यह नियम 2025-26 के प्रॉस्पेक्टस में भी शामिल था। विश्वविद्यालय के मुताबिक, उसकी एडमिशन प्रक्रिया में JEST को मान्य परीक्षा के तौर पर शामिल नहीं किया गया था।
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट में याचिका खारिज कर दी गई। कोर्ट ने कहा कि JEST राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा जरूर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर विश्वविद्यालय उसे पीएचडी एडमिशन के लिए स्वीकार करे। जब विश्वविद्यालय ने अपनी पात्रता शर्तों में UGC NET को शामिल किया है, तो उम्मीदवार JEST को उसके विकल्प के तौर पर मानने की मांग नहीं कर सकता।
