Nikah Halala: निकाह हलाला के नाम पर मुस्लिम महिलाओं की अस्मत लूटने का सिलसिला काफी पुराना है। इस्लामिक प्रथा की आड़ में न जाने कितनी महिलाओं की मजबूरियों का फायदा उठाया जाता है। दरअसल, बीते एक दिन पहले ही हलाला से जुड़ा एक सन्न करने वाला मामला उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी से आया है। एक मुस्लिम महिला का हलाला के नाम पर शारीरिक शोषण किया गया और उसके शौहर समेत चार लोगों के उसका फायदा उठाया। पुलिस ने बुधवार को बताया था कि एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई है कि 12 साल की शादी में उसे तीन बार तीन तलाक दिया गया और उसके पति के बहनोई के साथ 'निकाह हलाला' किया गया। हलाला के नाम पर उगाही और शोषण से जुड़ी कई वारदातों का खुलासा इससे पहले कई मीडिया रिपोर्ट्स में हो चुका है। ऐसे में आपको इस लेख के जरिए हलाला से जुड़ी हर छोटी बड़ी बात बताते हैं।
मुस्लिम महिलाओं के लिए अभिशाप है निकाह हलाला प्रथा!
मजबूरी का फायदा उठाकर महिला के साथ गुजारते हैं रात
इस्लामी कानून (मुस्लिम पर्सनल लॉ) के प्रावधानों के तहत निकाह हलाला से जुड़े ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें शादी बचाने के लिए महिला के साथ यौन संबंध स्थापित किए जाते हैं। इस प्रथा में कई मौलवियों ने महिलाओं की मजबूरी का फायदा उठाकर उनके साथ रात गुजारी है। कई मीडिया एंवेस्टिगेटिव रिपोर्ट्स में ये खुलासा हो चुका है कि निकाह हलाला की विवादित प्रक्रिया का हिस्सा बनने के एवज में लाखों रुपये तक की रकम ऐंठे जाते हैं।
जानिए क्या है रूह कपां देने वाली प्रथा निकाह हलाला
अगर किसी मुस्लिम महिला का तलाक हो चुका है या यूं कहें कि किसी के शौहर ने अपनी बेगम को तीन तलाक दे दिया हो और अगर महिला उसी शौहर से दोबारा निकाह करना चाहती है, तो उसे एक एक अजीबो-गरीब प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा। महिला को पहले किसी और शख्स से शादी कर एक रात गुजारनी पड़ती है, यूं कहे कि महिला के साथ कोई दूसरा शख्स एक रात के लिए सेक्स करता है, इसे निकाह हलाला कहते हैं.
क्या सचमुच इस्लाम में हराम है हलाला?
जब महिला किसी दूसरे शख्स से निकाह कर लेती है और एक रात गुजार लेती है, तो फिर बाद उस दूसरे शख्स से महिला को तलाक लेना होता है। दूसरे शख्स से तलाक होने के बाद ही वो अपने पहले पति के साथ दोबारा निकाह कर सकेगी। अजीब बात तो ये भी है कि तलाक देने के लिए दूसरे पति को मजबूर नहीं किया जा सकता, वो अगर तलाक देना न चाहे तो दोनों शौहर-बेगम को जिंदगी साथ बितानी पड़ेगी। कई इस्लामिक स्कॉलर्स कहते हैं कि मौलवियों ने अपने मर्जी से हलाला के इस नियम को तोड़ा-मरोड़ा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस्लाम में हालाला हराम है। अगर कोई शौहर अपनी बेगम को तलाक-ए-मुगल्लज़ा यानी तीन तलाक दे देता है, तो वो उस महिला से दोबारा निकाह नहीं कर सकता है। इस प्रथा को लेकर कई अलग-अलग दावे किए जाते हैं।
यूसीसी से ऐसी 'कुप्रथाओं' पर लगेगा पूर्णविराम!
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर बहस ने तूल पकड़ रखा है। इस संहिता को यदि आसान भाषा में समझा जाए तो इसका सीधा मतलब है, 'एक देश-एक कानून...' शादी, तलाक, गोद लेने के नियम, उत्तराधिकारी, संपत्तियों से जुड़े मामलों के लिए सभी धर्मों में अलग-अलग कानून हैं. समान नागरिक संहिता के लागू होने के बाद सभी के लिए सिर्फ एक ही कानून होगा। यानी अगर देश में यूसीसी लागू हो जाता है तो निकाह हलाला जैसी कुप्रथाओं पर लगाम लग जाएगा।
