मध्यप्रदेश के इंदौर पर एक महिला पुलिसकर्मी ने ऐसा करनामा कर दिखाया है कि लोग उन्हें अब लेडी सिंघम की उपाधि दे रहे हैं। रैगिंग करने वाले बदमाश छात्रों को पकड़ने के लिए महिला पुलिस शालिनी चौहान ने करीब पांच महीने तक नकली पहचान के साथ कॉलेज में अंडरकवर ऑपरेशन करती रही, जिसके बाद उन छात्रों की पहचान हो सकी, जो रैगिंग में लिप्त थे।
मेडिकल स्टूडेंट बनकर कॉलेज में रही शालिनी चौहान
केस की शुरूआत
यह एक पूरी तरह से ब्लाइंड केस था। पुलिस को सीनियर्स और जूनियर्स के बीच व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट वाली एक गुमनाम शिकायत मिली थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि प्रथम वर्ष के छात्रों से अश्लील हरकतें करवाई जाती हैं। जैसे तकिए के साथ यौन संबंध बनाने के लिए कहा जाता है, अप्राकृतिक सेक्स के लिए मजबूर किया जाता है। हालांकि इस शिकायत में किसी का नाम नहीं था। इसलिए पुलिस के सामने आरोपियों को पकड़ना एक मुश्किल काम था। पुलिस शिकायत की जांच करने के लिए कॉलेज भी गई, लेकिन डर के मारे छात्रों ने कुछ नहीं कहा।
Indore Blind Ragging Case: कैसे लेडी सिंघम ने अंडर कवर होकर किया रैगिंग मामले का पर्दाफाश?सब्सक्राइब करें… t.co/HPEWD2Xisx
— ANI (@ANI) Dec 13, 2022
बना खुफिया प्लान
इसके बाद पुलिस ने खुफिया प्लान बनाया। प्लान के अनुसार एक पुलिसकर्मी को ही कॉलेज के अंदर छात्र बनाकर भेजना था। इसके लिए शालिनी चौहान को जिम्मेदारी दी गई। वो एक मेडिकल स्टूडेंट बनकर कॉलेज में घुसी और वहां कैंटिन में अपना अड्डा जमा लिया। जिन छात्रों पर शक था उसपर उन्होंने नजर रखनी शुरू कर दी। इस तरह वो कई दिनों तक अन्य छात्रों से मिलती रही, दोस्ती करती रही और रैगिंग के बारे में जानकारी जुटाती रही।
और पकड़ा गया गैंग
शालिनी चौहान अपनी रिपोर्ट सीनियर अधिकारियों को भी भेजती रही। इसके बाद जब आरोपी छात्रों की पहचान हो गई तो पुलिस ने इस ऑपरेशन के बारे में मीडिया को बता दिया। इस मामले में 11 छात्रों की पहचान की गई है। जिसमें से नौ मध्यप्रदेश के ही हैं। इसके अलावा एक बंगाल और एक बिहार का है। गुरुवार को संयोगितागंज थाने में बुलाए जाने और नोटिस दिए जाने पर आरोपी छात्र अवाक रह गए। हालांकि उन्हें जमानत मिल गई, लेकिन पुलिस आगे की कार्रवाई करने में जुटी है।
