साल 1999 में एक ऑस्ट्रेलियाई ईसाई मिशनरी ग्राहम स्टुअर्ट स्टेन्स को उनके दो बेटों फिलिप (10 वर्ष की आयु) और टिमोथी (6 वर्ष की आयु) के साथ ओडिशा में जला दिया गया था। इस हत्याकांड में 2003 में बजरंग दल के कार्यकर्ता दारा सिंह को हत्यारों का नेतृत्व करने का दोषी ठहराया गया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। अब दारा सिंह सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। उसने मांग की है कि उसकी सजा माफ कर दी जाए। इसके लिए उसने राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई का हवाला दिया है।
ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस और नाबालिग बेटों का हत्यारा पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
ओडिशा में ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस और नाबालिग बेटों की हत्या का मामला में उम्रकैद के सजायाफ्ता कैदी दारा सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से सजा माफी की आपील करते हुए कहा कि दो दशक पहले किए अपराध को कबूल करता है और उस पर खेद है। उन्होंने कहा कि ग्राहम स्टेंस से कोई निजी दुश्मनी नहीं थी। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इसे लेकर ओडिशा सरकार को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने इसपर 6 हफ्ते में सरकार से जवाब मांगा है।
ग्राहम स्टुअर्ट स्टेन्स को क्यों मारा गया था
स्टेंस 1965 से ओडिशा में "मयूरभंज लेप्रोसी होम" नामक एक इंजील मिशनरी संगठन के हिस्से के रूप में काम कर रहे थे, जो कुष्ठ रोगियों की देखभाल करते थे और क्षेत्र के आदिवासी लोगों की देखभाल करते थे जो घोर गरीबी में रहते थे। हालांकि, कुछ हिंदू समूहों का तर्क है कि इस दौरान उन्होंने कई हिंदुओं को ईसाई धर्म में विश्वास करने के लिए धोखा दिया, लालच दिया या जबरन मजबूर किया। वाधवा आयोग का दावा है कि हालांकि कुछ आदिवासियों को शिविरों में बपतिस्मा दिया गया था, लेकिन जबरन धर्मांतरण का कोई सबूत नहीं था। स्टेंस की विधवा ग्लेडिस ने भी जबरन धर्मांतरण की बात से इनकार किया है।
