Digital Arrest Scam in India: गृह मंत्रालय और CBI ने सोमवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय को सूचित किया कि साइबर अपराधियों ने डिजिटल गिरफ्तारी का इस्तेमाल नागरिकों को मजबूर करने के लिए किया है। बताया गया कि सबसे ज्यादा डिजिटल अरेस्ट बुजुर्ग हुए। वहीं, पूरे भारत में साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए लगभग 3,000 करोड़ रुपये लूटे हैं।
भारत में फलता फूलता जा रहा डिजिटल अरेस्ट का धंधा (Photo-AP)
'डिजिटल गिरफ्तारी घोटाले का प्रसार समझ से परे है'
मनोनीत मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने गृह मंत्रालय और सीबीआई द्वारा दायर सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट का अवलोकन किया और कहा, 'डिजिटल गिरफ्तारी घोटाले का फैलना, आगे चलते जाना समझ से परे है। धोखाधड़ी के कार्य बहुस्तरीय हैं और अकेले भारत में एजेंसियों को प्रारंभिक अनुमान है कि घोटालेबाज नागरिकों से 3,000 करोड़ रुपये चुरा रहे हैं।'
कैसे पहुंचा मामला SC?
न्यायमूर्ति कांत की अगुवाई वाली पीठ ने डिजिटल गिरफ्तारी घोटाले का स्वत: संज्ञान लिया था। दरअसल, हरियाणा के अंबाला के एक सत्तर वर्षीय दंपति ने सर्वोच्च न्यायालय को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि उन्हें अपनी जीवन भर की बचत कुल एक करोड़ रुपये से हाथ धोना पड़ा। इन्हें सर्वोच्च न्यायालय और प्रवर्तन निदेशालय के जाली आदेश दिखाकर झूठ में डिजिटल अरेस्ट कर लिया गया था।
सरकार कोर्ट से क्या मांगेगी?
मेहता ने कहा कि जिन लोगों को अपनी रकम देने के लिए मजबूर किया गया, उनमें से अधिकांश बुजुर्ग थे और एजेंसियों को अदालत से कुछ आदेश पारित करने की आवश्यकता होगी, जिसका प्रस्ताव वह 10 नवंबर को अगली सुनवाई के दौरान रखेंगे।
न्यायमूर्ति कांत ने कहा, 'अदालत जांच एजेंसियों के हाथ मजबूत करना चाहेगी। हमें साइबर घोटालेबाजों को कुछ कानूनी खामियों का फायदा उठाने से रोकने के लिए कुछ कठोर आदेश पारित करने की आवश्यकता है।' 'इस आपराधिक गतिविधि से सख्ती से निपटने की जरूरत है।'
ये भी है मामला
गृह मंत्रालय और CBI ने अदालत को बताया कि डिजिटल गिरफ्तारी के जरिए होने वाली इस ठगी का ज्यादातर काम भारत के युवा करते हैं, जिन्हें विदेशों में नौकरी का झूठा वादा करके फुसलाया जाता है और विदेशी घोटालेबाजों के परिसरों में गुलाम बनाकर रखा जाता है और उन्हें इस घोटाले को अंजाम देने के लिए मजबूर किया जाता है। मेहता ने कहा कि इन भारतीय युवाओं के पास अपने नियोक्ताओं की बात मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता क्योंकि उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए जाते हैं।
न्यायमूर्ति कांत ने कहा, 'यह घोटाला तीन स्तंभों - वित्तीय, तकनीकी और मानवीय पहलू - के माध्यम से अंजाम दिया जाता है। मेरे कार्यालय ने एक संक्षिप्त नोट तैयार किया है, जिसमें घोटाले से निपटने के संभावित उपाय सुझाए गए हैं। एजेंसियां इन सुझावों पर विचार कर सकती हैं।'
