भारत में फलता फूलता जा रहा डिजिटल अरेस्ट का धंधा, कोर्ट बोला- मामला समझ से परे...सबसे ज्यादा लूटे जा रहे ये लोग

न्यायमूर्ति कांत की अगुवाई वाली पीठ ने डिजिटल गिरफ्तारी घोटाले का स्वत: संज्ञान लिया था। दरअसल, हरियाणा के अंबाला के एक सत्तर वर्षीय दंपति ने सर्वोच्च न्यायालय को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि उन्हें अपनी जीवन भर की बचत कुल एक करोड़ रुपये से हाथ धोना पड़ा। इन्हें सर्वोच्च न्यायालय और प्रवर्तन निदेशालय के जाली आदेश दिखाकर झूठ में डिजिटल अरेस्ट कर लिया गया था।

Digital Arrest Scam in India: गृह मंत्रालय और CBI ने सोमवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय को सूचित किया कि साइबर अपराधियों ने डिजिटल गिरफ्तारी का इस्तेमाल नागरिकों को मजबूर करने के लिए किया है। बताया गया कि सबसे ज्यादा डिजिटल अरेस्ट बुजुर्ग हुए। वहीं, पूरे भारत में साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए लगभग 3,000 करोड़ रुपये लूटे हैं।

ARREST

भारत में फलता फूलता जा रहा डिजिटल अरेस्ट का धंधा (Photo-AP)

'डिजिटल गिरफ्तारी घोटाले का प्रसार समझ से परे है'

मनोनीत मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने गृह मंत्रालय और सीबीआई द्वारा दायर सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट का अवलोकन किया और कहा, 'डिजिटल गिरफ्तारी घोटाले का फैलना, आगे चलते जाना समझ से परे है। धोखाधड़ी के कार्य बहुस्तरीय हैं और अकेले भारत में एजेंसियों को प्रारंभिक अनुमान है कि घोटालेबाज नागरिकों से 3,000 करोड़ रुपये चुरा रहे हैं।'

End of Feed