बेंगलुरु में नकली दवाओं के कारोबार से जुड़े एक बड़े रैकेट का प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने खुलासा किया है। ED के बेंगलुरु जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में बेंगलुरु और आसपास के इलाकों में 5 ठिकानों पर छापेमारी कर तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 की धारा 17 के तहत की गई।
प्रतीकात्मक फोटो
ED की यह जांच कर्नाटक के बेंगलुरु साउथ स्थित तवारेकेरे पुलिस स्टेशन में 18 अगस्त 2026 को दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई थी। आरोप है कि कुछ लोग बिना किसी वैध लाइसेंस या अनुमति के दवाओं का भंडारण कर रहे थे और उन पर लगे असली लेबल हटाकर नए लेबल लगा रहे थे।
फार्महाउस में चल रहा था नकली दवाएं तैयार करने का खेल
जांच में सामने आया है कि आरोपी आर. प्रशांत ने बिदादी के पास एक फार्महाउस का इंतजाम किया था। आरोप है कि इसी फार्महाउस में बिना ड्रग लाइसेंस के दवाओं की पैकेजिंग और री-लेबलिंग का काम किया जा रहा था।इस रैकेट में दूसरे राज्यों के अलग-अलग मैन्युफैक्चरिंग सेंटर से सस्ती जेनेरिक दवाएं और बल्क फॉर्मूलेशन मंगाए जाते थे। इसके बाद इन दवाओं को नई शीशियों में भरकर उन पर महंगी Pfizer एंटीबायोटिक दवाओं के लेबल लगा दिए जाते थे।
आरोपियों ने सस्ती जेनेरिक दवाओं को Pfizer की महंगी एंटीबायोटिक दवाएं Zavicefta और Emblaveo बताकर बेचने की तैयारी की थी। यानी शीशी पर नाम और ब्रांड तो महंगी दवा का होता था, लेकिन उसके अंदर दूसरी जेनेरिक दवाएं भरी होती थीं।
फार्मा कंपनियों और अस्पतालों तक पहुंचाई जा रही थीं दवाएं
ED के मुताबिक, इस फर्जीवाड़े के जरिए तैयार की गई दवाओं की सप्लाई M/s DM Pharmaceuticals के माध्यम से की जाती थी। इसके बाद M/s Krupa Healthcare को ये दवाएं दी जाती थीं।आरोप है कि Krupa Healthcare आगे दूसरी फार्मास्यूटिकल कंपनियों और अस्पतालों को इन दवाओं की सप्लाई करता था। खास बात यह थी कि इन दवाओं को असली दवाओं के साथ मिलाकर भेजा जाता था, ताकि किसी को शक न हो और नकली दवाओं की पहचान करना मुश्किल हो जाए।
ED की छापेमारी में 9 लाख रुपये के बैंक खाते फ्रीज
छापेमारी के दौरान ED ने वीरेश कुमार के बैंक खातों में मौजूद करीब 9 लाख रुपये की रकम फ्रीज कर दी है। इसके अलावा कई लोगों से जुड़े डिजिटल डिवाइस, रिकॉर्ड और इस पूरे रैकेट से संबंधित अहम दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। ED अब इन दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, नकली दवाओं की सप्लाई कहां-कहां की गई और इस पूरे कारोबार से कितनी अवैध कमाई की गई। फिलहाल ED की जांच जारी है।
