भारत समेत चार मुल्कों में ‘डार्क वेब’ की मदद से चल रहे मादक पदार्थ की तस्करी के गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। यह एक्शन स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (Narcotics Control Bureau : NCB) की ओर से लिया गया है। एनसीबी के डिप्टी-डायरेक्टर जनरल ज्ञानेश्वर सिंह ने मंगलवार (छह जून, 2023) को इसके डिटेल्स देते हुए इसे एंटी ड्रग एजेंसी की ओर से अब तक की सबसे बड़ी ड्रग जब्ती (Lysergic Acid Diethylamide : LSD की अब तक की ‘‘सबसे बड़ी खेप’’ जब्त) करार दिया।
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (क्रिएटिवः अभिषेक गुप्ता)
सिंह ने समाचार एजेंसी एएनआई को इस बारे में बताया- यह बड़ा नेटवर्क था और पोलेंड, नीदरलैंड, अमेरिका, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु और यूपी तक फैला हुआ था। ये लोग क्रिप्टोकरेंसी और डार्कनेट का इस्तेमाल करते थे। ढाई किलो मारिजुआना, चार लाख 65 हजार रुपए और बैंकों में जमा 20 लाख रुपए जब्त किए गए हैं।
उन्होंने आगे जानकारी दी, "हमने दो मामलों में छह लोग (छात्र और युवा) गिरफ्तार किए हैं और एलएसडी ड्रग्स की 15 हजार ब्लॉट जब्त की है, जिसकी ढाई हजार गुणा से अधिक कमर्शियल क्वांटिटी है। इस ड्रग की कमर्शियल क्वांटिटी दशमलव एक (.1) ग्राम बै। यह एक तरह की सिथेंटिक ड्रग है और यह बहुत खतरनाक होती है। यह पिछले दो दशकों में अब तक की सबसे बड़ी जब्ती है।" उन्होंने बताया कि अभी तक कर्नाटक पुलिस ने 2021 में एलएसडी के सबसे अधिक 5,000 ब्लॉट्स जब्त किए थे। एलएसडी का सबसे अधिक दुरुपयोग युवा कर रहे हैं और इससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
दरअसल, एलएसडी सिंथेटिक रसायन आधारित एक मादक पदार्थ है और इसे मतिभ्रमकारी के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जबकि ‘डार्क वेब’ का मतलब इंटरनेट में गहराई में छिपे उन प्लैटफॉर्म्स से है, जिनका इस्तेमाल मादक पदार्थ को बेचने, पोर्न कंटेट के आदान-प्रदान और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के लिए किया जाता है। इंटरनेट पर कम्युनिकेशन में गोपनीयता बनाए रखने के लिए ‘अॅनियन राउटर’ की मदद से इन गतिविधियों को अंजाम दिया जाता है, ताकि कानून प्रवर्तन एजेंसियां इन्हें पकड़ न पाएं।
