Sleeping State of India: विविधताओं से भरे भारत देश में 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं। हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की अपनी एक अलग पहचान और खासियत है। कोई राज्य अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना, तो कोई राज्य अपनी परंपरा, संस्कृति और खानपान के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक राज्य है, जिसे स्लीपिंग स्टेट ऑफ इंडिया के नाम से जाना जाता है। स्लीपिंग स्टेट नाम सुनकर आप सोच रहे होंगे की सोया हुआ राज्य? क्या यहां के लोग सोये रहते हैं या यहां रहने वाले लोग आलसी है? इस तरह के कई सवाल आपके मन में आ रहे होंगे। लेकिन असलियत हमारी सोच से बिल्कुल अलग है। न तो इस राज्य में विकास की रफ्तार धीमी है और न ही यहां के लोग आलसी हैं। तो क्या कारण है कि इस राज्य को स्लीपिंग स्टेट और इंडिया कहा जाता है।
भारत के किस राज्य को कहा जाता है Sleeping State
भारत के किस राज्य को कहा जाता है 'स्लीपिंग स्टेट ऑफ इंडिया'
उत्तर भारत में स्थित खूबसूरत वादियों, पहाड़ों और दिलकश नजारों से भरे हिमाचल प्रदेश को भारत का स्लीपिंग स्टेट के तौर पर जाना जाता है। हिमाचल प्रदेश को भले की स्लीपिंग स्टेट कहा जाता है, लेकिन यहां विकास की रफ्तार बिल्कुल धीमी नहीं है। न ही यहां रहने वाले लोग आलसी है। यहां के लोग सुकून का जीवन जीना चाहते हैं और एक साधारण दिनचर्या का पालन करते हैं। विकास के मामले में हिमाचल प्रदेश एक अच्छा उदाहरण पेश करता है। इस राज्य को स्लीपिंग स्टेट के अलावा Apple State of India के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यहां सेब का सबसे अधिक उत्पादन होता है। इतना ही नहीं हिमाचल प्रदेश भारत का पहला धूम्रपान-रहित राज्य भी है।
भारत के किस राज्य को कहा जाता है स्लीपिंग स्टेट ऑफ इंडिया
क्यों मिला स्लीपिंग स्टेट का नाम
हिमाचल प्रदेश को स्लीपिंग स्टेट कहने की सबसे बड़ी वजह यहां की शांत और सुकून से भरी जीवनशैली है। दरअसल, यहां लोग सूरज ढलते ही अपना काम खत्म कर देते हैं और अपने-अपने घर लौट जाते हैं। रात होते ही दुकानें बंद कर दी जाती है। गलियां शांत हो जाती हैं और लोग अपने घरों में रहते हैं। सूरज उगने के साथ ही यहां लोगों की सुबह भी जल्दी हो जाती है। बड़ों शहरों की तरह यहां भागमभाग नहीं है।
हिमाचल प्रदेश स्लीपिंग स्टेट ऑफ इंडिया
हिमाचल प्रदेश को सुप्त राज्य यानी स्लीपिंग स्टेट इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यहां के लोग साधारण दिनचर्या का पालन करते हैं और जल्दी सो जाते हैं। रात का खाना हो या अन्य काम अंधेरा होने से पहले कर लिए जाते हैं। साथ ही लोग घने अंधेरे में बाहर निकलने से बचते हैं। शोर-शराबे से दूर लोग पहाड़ों की ताजी हवा और शांत वातावरण के साथ सुकून वाला जीवन व्यतीत करना चाहते हैं।
