कौन थे पंडित छन्नूलाल मिश्र; शास्त्रीय संगीत का वह दिग्गज, जिसके ना रहने से सूना हो गया बनारस

पंडित छन्नूलाल मिश्र जी का जीवन भारतीय शास्त्रीय संगीत की उस परंपरा का प्रतीक था, जो सुर, साधना और संस्कृति को एक सूत्र में पिरोती है। उनकी आवाज अब नहीं गूंजेगी लेकिन उनके राग, ठुमरी और चैती के सुर संगीत प्रेमियों के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगे।

गुरुवार तड़के शास्त्रीय संगीत के दिग्गज गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन हो गया। 91 साल की उम्र में दशहरे की सुबह करीब सवा चार बजे उन्होंने अंतिम सांस ली और इसी के साथ बनारस घराने की एक महत्वपूर्ण कड़ी टूट गई। उनकी आवाज ने दशकों तक ठुमरी और चैती को नई पहचान दी। उनके निधन से न केवल काशी बल्कि पूरा संगीत जगत शोक में डूब गया है।

about chhannulal mishra in hindi

बनारस में संगीत के पर्याय थे पंडित (चित्र साभार: Facebook)

संगीत को समर्पित जीवन

कागजी बात करें तो, 3 अगस्त 1936 को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के हरिहरपुर गांव में छन्नूलाल मिश्र का जन्म हुआ। असल तारीख 15 अगस्त है। कवि और लेखक व्योमेश शुक्ल की किताब 'आग और पानी' में छन्नूलाल खुद ये बात कहते हैं। जीवन संगीत के सुरों में रचा-बसा था। परिवार में सात पीढ़ी से संगीत था। दादा शीतल प्रसाद, पिता बद्री महाराज और छन्नूलाल के दो भाई-एक बहन सब संगीत से जुड़े थे। कठिन बचपन बीता लेकिन संगीत के प्रति अटूट लगाव ने उन्हें वाराणसी की पावन धरती तक ले आया, जिसे उन्होंने अपनी कर्मभूमि बना लिया।

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