काशी भगवान शिव की नगरी है। इसे वाराणसी के नाम से भी जाना जाता है। काशी के कण-कण में शिव समाहित हैं। भगवान शिव की नगरी काशी का अब क्रिकेट के जरिए आधुनिक युग के साथ संगम होने जा रहा है। काशी धार्मिक नगरी है और क्रिकेट देश की नसों में बहता है, यह भी एक धर्म जैसा है। इसी वाराणसी में बन रहा क्रिकेट स्टेडियम अब काफी हद तक आकार ले चुका है। इसके आकार को देखकर आप भी कहेंगे कि यह तो भगवान शिव और क्रिकेट का अनोखा संगम है।
वाराणसी स्टेडियम
वाराणसी में बन रहा यह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम न सिर्फ खेल का मैदान होगा, बल्कि यह काशी की संस्कृति, आध्यात्मिकता और आधुनिक इंजीनियरिंग का एक बेजोड़ नमूना भी होगा। 31 एकड़ में फैला यह भव्य स्टेडियम भगवान शिव की थीम पर आधारित है, जो इसे दुनिया के सबसे अनूठे स्टेडियमों में से एक होगा।
वाराणसी के सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 सितंबर 2023 को इस स्टेडियम की नींव रखी थी। लगभग 450 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में शुरुआती तौर पर 30 हजार दर्शकों के बैठने की क्षमता होगी, जिसे भविष्य में और बढ़ाया जा सकता है।
वाराणसी स्टेडियम में त्रिशूल आकार की फ्लड लाइट लगी
भगवान शिव को समर्पित डिजाइन
निर्माणाधीन वाराणसी अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम का हर कोना काशी और महादेव की महिमा को दर्शाता है -
- त्रिशूल के आकार की फ्लड लाइट्स : स्टेडियम में लगाई गई फ्लड लाइट्स को भगवान शिव के त्रिशूल का आकार दिया गया है।
- डमरू जैसा मीडिया सेंटर : स्टेडियम में बन रहे मीडिया सेंटर का डिजाइन भगवान शिव के डमरू से प्रेरित है, जो इसे एक अलग ही लुक देता है।
- अर्धचंद्राकार छत : स्टेडियम की छत भगवान शिव के मस्तक पर सुशोभित अर्धचंद्र के आकार में बनाई गई है।
- वाराणसी की घाटों सी सीटें : दर्शकों के बैठने की व्यवस्था वाराणसी के प्रसिद्ध घाटों की सीढ़ियों की तरह की गई है।
- बेलपत्र जैसा एक्सटीरियर : भगवान शिव को बेलपत्र भी चढ़ाया जाता है और स्टेडियम का बाहरी हिस्सा महादेव को प्रिय बेलपत्र के डिजाइन के फसाड से ढका होगा।
वाराणसी स्टेडियम की मुख्य विशेषताएं
वाराणसी स्टेडियम का काम अभी कहां तक पहुंचा?
वाराणसी स्टेडियम का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और अब यह आकार लेने लगा है। चारों फ्लड लाइट्स लगाई जा चुकी हैं और छत का भी लगभग 50 फीसद काम पूरा हो चुका है। मुख्य मैदान पर हरी घास की कालीन बिछाई जा चुकी है, जबकि स्टेडियम में दर्शकों के बैठने के लिए सीटें लगाने का काम भी युद्धस्तर पर चल रहा है। इसके अलावा, स्टेडियम के एंट्री गेट और पार्किंग एरिया का ढांचा भी तैयार हो चुका है।
स्टेडियम में बन रहा डमरू के आकार का प्रेस बॉक्स
वाराणसी स्टेडियम पूर्वांचल के खेल जगत के लिए नई सुबह
वाराणसी में इस स्टेडियम के बन जाने से न सिर्फ वाराणसी, बल्कि पूरे पूर्वांचल के खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मिलेंगी। अब तक अच्छी ट्रेनिंग और मैच के लिए खिलाड़ियों को दूर जाना पड़ता था, लेकिन अब वे अपने ही शहर में विश्वस्तरीय पिच और प्रैक्टिस सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। इससे क्षेत्र में खेलों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था व पर्यटन में भी भारी उछाल आने की उम्मीद है।
वाराणसी इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम की 10 खास बातें
स्टेडियम में वाराणसी के घाटों से प्रेरित बैठने की व्यवस्था की गई है
- सांस्कृतिक धरोहर : स्टेडियम का डिजाइन पूरी तरह से काशी की विरासत और महादेव की थीम पर आधारित है।
- आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम : बारिश के बावजूद मैच जल्द शुरू करने के लिए स्टेडियम में अत्याधुनिक ड्रेनेज सिस्टम लगाया गया है।
वाराणसी स्टेडियम के बाहर के हिस्से को बेलपत्र स्टाइल में सजाया जा रहा है
- वर्ल्ड क्लास फैसिलिटी : खिलाड़ियों के लिए मॉडर्न ड्रेसिंग रूम और वीआईपी/वीवीआईपी बॉक्स बनाए जा रहे हैं।
- डिजिटल अनुभव : स्टेडियम में दो जाइंट स्क्रीन लगाई जा रही हैं, जिनमें से एक लग चुकी है। इससे दर्शकों को छोटी से छोटी चीज भी आसानी से दिखेगी।
- ट्रेनिंग सेंटर : भविष्य के खिलाड़ियों के लिए स्टेडियम में अलग से ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है।
- कनेक्टिविटी : स्टेडियम तक पहुंचने के लिए शहर में बेहतर सड़कों और पार्किंग का निर्माण किया जा रहा है।
- टूरिज्म को मिलेगा बूस्ट : भविष्य में यहां डॉमेस्टिक और इंटरनेशनल मैच होने से पर्यटन को नई पहचान मिलेगी।
- रोजगार के अवसर : निर्माण और संचालन के दौरान स्थानीय लोगों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर खुलेंगे।
- इको-फ्रेंडली डिजाइन : वाराणसी के इस स्टेडियम को ऊर्जा कुशल और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा रहा है।
- भविष्य की तैयारी : स्टेडियम का ढांचा ऐसा बनाया जा रहा है कि भविष्य में यहां सीटों की संख्या आसानी से बढ़ाई जा सकती है।
