Uttarkashi Landslide & Cloudburst: उत्तरकाशी के धराली क्षेत्र के खीरगाड में भूस्खलन की विनाशकारी घटना सामने आई, जिसके बाद राहत और बचाव कार्य जारी हैं। उत्तराखंड सरकार की जानकारी के मुताबिक सेना, ITBP, NDRF और SDRF की टीमों ने अब तक 130 लोगों को सुरक्षित बचा लिया है।
उत्तरकाशी में भूस्खलन के कारण बचाव अभियान जारी (फोटो: ANI)
14वीं RAJRIF के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल हर्षवर्धन अपनी 150 सदस्यीय टीम के साथ राहत कार्यों में जुटे हुए हैं। यूनिट का बेस इस आपदा में बुरी तरह प्रभावित हुआ है और 11 जवानों के लापता होने की आशंका जताई जा रही है, बावजूद इसके बचाव दल पूरी निष्ठा और साहस के साथ काम कर रहा है। अब तक 20 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, और राहत कार्यों को तेज करने के लिए अतिरिक्त टीमें भेजी जा रही हैं।
राहत शिविरों में स्वास्थ्य जांच जारी
प्रभावित लोगों की स्वास्थ्य जांच जारी
आपदा से प्रभावित 80 स्थानीय लोगों को सुरक्षित राहत शिविरों में पहुंचाया गया है, जहां उन्हें भोजन, पानी और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। ITBP के चिकित्सक शिविर में मौजूद लोगों की नियमित स्वास्थ्य जांच कर रहे हैं और उन्हें प्राथमिक उपचार भी दिया जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, भटवाड़ी से आगे का रास्ता टूटने के कारण प्रशासन और बचाव दल को आगे बढ़ने में काफी कठिनाई हो रही है। उत्तरकाशी से 14 किलोमीटर आगे मनेरी जल विद्युत परियोजना के पास रास्ते में गहरी दरारें पड़ गई हैं, जिसके चलते ITBP के जवानों ने एहतियातन मार्ग को बंद कर दिया है।
बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग हुआ बंद
वहीं, लगातार दो दिन से जारी भारी बारिश के कारण बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग कर्णप्रयाग के उमट्टा क्षेत्र में बंद हो गया है। पहाड़ियों से लगातार मलबा गिरने की वजह से हाईवे पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से रुक गई है। इसके साथ ही उत्तरकाशी-हर्सिल मार्ग पर भी विभिन्न स्थानों पर भूस्खलन की घटनाओं के चलते सड़कें बाधित हो गई हैं, जिन्हें जेसीबी मशीनों से साफ किया जा रहा है ताकि यातायात बहाल किया जा सके।
बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग हुआ बंद
त्रिवेणी घाट पर बढ़ा गंगा का जलस्तर
ऋषिकेश की त्रिवेणी घाट पर गंगा नदी इन दिनों उफान पर है और जलस्तर खतरे के निशान से कई मीटर ऊपर पहुंच चुका है। जहां प्रतिदिन गंगा आरती होती है, वह पूरा स्थान अब नदी की धारा में समा चुका है। घाट की पहली सीढ़ी तक पानी पहुंच चुका है और जल का बहाव तेजी से ऊपर की ओर बढ़ रहा है। इसके बावजूद श्रद्धालु दर्शन के लिए घाट पर पहुंच रहे हैं। उनका कहना है कि बढ़ते जलस्तर के कारण गंगा में स्नान करना संभव नहीं है, लेकिन वे यहां आकर मां गंगा का आशीर्वाद जरूर प्राप्त कर रहे हैं।
मौसम विभाग ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट
उत्तराखंड में भारी बारिश ने कहर बरपा रखा है। पर्वतीय इलाकों में लगातार हो रही अतिवृष्टि और भूस्खलन की घटनाओं ने स्थिति गंभीर बना दी है, जबकि मैदानी जिलों में उफनती नदियों और नालों के कारण हालात आपदा जैसे हो गए हैं। देहरादून में भी तेज बारिश की संभावना जताई गई है। उत्तरकाशी के धराली क्षेत्र में आपदा का प्रभाव सबसे अधिक देखने को मिल रहा है, वहीं अन्य पहाड़ी जिलों में भी लगातार बारिश के कारण जन-जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग ने बुधवार के लिए उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और उधम सिंह नगर में भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका जताते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। साथ ही देहरादून, नैनीताल, चंपावत और पौड़ी में गरज-चमक के साथ तेज बारिश के दौर की संभावना है।
भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाला मार्ग बाधित
चमोली से बड़ी खबर सामने आई है, जहां भारी बारिश के चलते भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाला मार्ग दो स्थानों पर बाधित हो गया है। चमोली जिले के रैणी गांव के पास जमीन में दरारें उभरने लगी हैं, जिससे स्थिति और भी चिंताजनक हो गई है। क्षेत्र में लगातार हो रही मूसलधार बारिश के कारण भूस्खलन और सड़कों पर मलबा आने की घटनाएं बढ़ गई हैं, जिससे सीमा की ओर जाने वाला मार्ग पूरी तरह से ठप हो गया है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और मार्ग को बहाल करने के प्रयास जारी हैं।
भारी बारिश से ये मार्ग हुए बदं
चमोली जनपद में लगातार हो रही बारिश के चलते बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग कई स्थानों पर अवरुद्ध हो गया है। लामबगड़ और हनुमानचट्टी के बीच देवगनी में मार्ग बंद है, वहीं बद्रीनाथ के पास कंचन नाला क्षेत्र में भी रास्ता बाधित है। पीपलकोटी के नजदीक भनेरपानी क्षेत्र में भी मार्ग पर मलबा आने से आवाजाही ठप हो गई है। इसके अलावा कमेडा गौचर मार्ग भी बाधित है। साथ ही, कर्णप्रयाग-ग्वालदम मोटर मार्ग पर बैनोली में एक पेड़ गिर जाने के कारण रास्ता अवरुद्ध हो गया है। प्रशासन द्वारा मार्गों को शीघ्र बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
धराली से पहले गंगनानी में सड़क बही
कल्प केदार मलबे में दबा
उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में मंगलवार को बादल फटने से खीर गंगा नदी में आई भीषण बाढ़ के कारण यहां मौजूद प्राचीन शिव मंदिर कल्प केदार मलबे में दब गया। यह मंदिर पहले भी किसी आपदा के चलते सालों तक जमीन के नीचे दबा रहा था और तब केवल इसका ऊपरी हिस्सा ही दिखाई देता था। कतुरे शैली में निर्मित यह शिव मंदिर वास्तुकला की दृष्टि से केदारनाथ धाम से मेल खाता है। मंदिर का गर्भगृह जमीन से नीचे स्थित था, जहां श्रद्धालुओं को प्रार्थना करने के लिए नीचे उतरना पड़ता था। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर में स्थापित शिवलिंग तक खीरगंगा नदी का पानी अक्सर पहुंचता है, जिसके लिए एक विशेष मार्ग भी बनाया गया था।
