HAPIDA SKYNeX: उत्तराखंड के अल्मोड़ा के एक युवा इनोवेटर ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसे कभी सिर्फ साइंस फिक्शन की कल्पना माना जाता था। अल्मोड़ा के काफलीखान गांव के रहने वाले रवि टम्टा ने अपने बनाए HAPIDA SKYNeX का सफल टेस्ट-फ्लाई पूरा किया है। यह एक सिंगल-सीटर इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल प्रोटोटाइप है, जिसे भविष्य में निजी परिवहन के एक नए विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।
HAPIDA SKYNeX ने दिखाया भविष्य के पर्सनल ट्रांसपोर्ट का नया मॉडल
पहाड़ी इलाकों के लिए जरूरी
रवि टम्टा के इस प्रयोग को खास तौर पर पहाड़ी इलाकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां खराब भौगोलिक परिस्थितियों और घुमावदार सड़कों के कारण कम दूरी तय करने में भी काफी समय लग जाता है। अगर इस तरह की तकनीक भविष्य में व्यावहारिक रूप से इस्तेमाल होने लगे, तो सड़क के बजाय हवाई रास्ते से सफर कर यात्रा का समय काफी कम किया जा सकता है।
कहां से आया इस इनोवेशन का खयाल
रवि ने बताया कि उनके गांव से करीब 40 किलोमीटर की दूरी सड़क मार्ग से तय करने में लगभग डेढ़ घंटे का वक्त लग जाता है। उनके मन में विचार आया कि यदि इसी दूरी को हवाई रास्ते से तय किया जाए, तो इसे करीब 10 मिनट में पूरा किया जा सकता है। इसी सोच ने उन्हें एक ऐसे इलेक्ट्रिक पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल पर काम करने के लिए प्रेरित किया, जो विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में आवाजाही के तरीके को बदल सके।
रवि के करियर का सबसे अहम पड़ाव
रवि ने HAPIDA SKYNeX की पहली सफल उड़ान को अपने करियर का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उनका कहना है कि इस उपलब्धि के पीछे सालों की रिसर्च, लगातार प्रयोग, चुनौतियों से जूझना और मेहनत शामिल है। पहली उड़ान सफल होने के बाद उन्होंने खुशी और गर्व जाहिर करते हुए इसे अपने लंबे प्रयासों का नतीजा बताया।
गाड़ी सड़क पर नहीं, अब आसमान में चलेगी
जमकर वायरल हो रहा HAPIDA SKYNeX का वीडियो
रवि टम्टा के इस इनोवेशन का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद लोग उनकी तकनीक और मेहनत की जमकर चर्चा कर रहे हैं। कुछ यूजर्स का मानना है कि अगर यह तकनीक आगे विकसित होकर व्यावसायिक स्तर पर इस्तेमाल होने लगी, तो पहाड़ी क्षेत्रों में परिवहन के लिए यह बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।
तकनीकी और आर्थिक सहयोग देने की अपील
वहीं, कई लोगों ने रवि की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने की मांग करते हुए सरकार और संबंधित संस्थाओं से ऐसे स्थानीय इनोवेटर्स को तकनीकी और आर्थिक सहयोग देने की अपील की है। रवि टम्टा का यह प्रयास दिखाता है कि बड़े तकनीकी संस्थानों से दूर पहाड़ के एक गांव से भी ऐसे आइडिया सामने आ सकते हैं, जो भविष्य के परिवहन की तस्वीर बदलने की क्षमता रखते हैं।
