Muzaffarnagar home guard murder case: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद की एक फास्ट ट्रैक कोर्ट ने कानून और व्यवस्था की रक्षा करने वाले एक जांबाज होमगार्ड की हत्या के मामले में ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने घटना के 6 साल बाद आरोपी को दोषी करार देते हुए 'मौत की सजा' (फांसी) सुनाई है। न्यायालय के इस आदेश के बाद दोषी को भारी पुलिस सुरक्षा के बीच जेल भेज दिया गया है।
मुजफ्फरनगर न्यूज: मां को पीट रहे युवक को रोकने पर होमगार्ड की चाकू मारकर की थी हत्या, अब 6 साल बाद मिली फांसी की सजा
क्या था पूरा मामला?
यह खौफनाक वारदात 4 जून 2020 की रात करीब 10:30 बजे की है। नगर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बुढ़ाना मोड़ पर दीपक नाम का एक युवक अपनी सगी मां को बेहद बेरहमी से पीट रहा था। मां की चीख-पुकार और 'बचाओ-बचाओ' की आवाज सुनकर इलाके में सनसनी फैल गई थी।
उसी समय मोटर साइकिल से रात्रि गश्त (पेट्रोलिंग) कर रहे पुलिस कांस्टेबल इस्लाम अली और होमगार्ड रतिराम वहां से गुजर रहे थे। महिला की रोने-चिल्लाने की आवाज सुनकर दोनों पुलिसकर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे।
बीच-बचाव करने पर पेट में घोंप दिया था चाकू
मौके पर पहुंचकर जब होमगार्ड रतिराम ने देखा कि दीपक अपनी मां को बुरी तरह पीट रहा है, तो उन्होंने आगे बढ़कर बीच-बचाव किया और दीपक को ऐसा करने से रोका। वर्दीधारियों को देखकर आरोपी दीपक और ज्यादा तैश में आ गया। वह पुलिसकर्मियों को ही मां-बहन की गालियां देने लगा। जब रतिराम ने उससे पूछा कि वह अपनी मां को क्यों पीट रहा है, तो गुस्से से पागल हो चुके दीपक ने पास में रखा धारदार चाकू सीधे होमगार्ड रतिराम के पेट में घोंप दिया।
चाकू लगने से होमगार्ड रतिराम लहूलुहान होकर वहीं गिर गए और गंभीर रूप से घायल हो गए। वारदात को अंजाम देकर आरोपी दीपक अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया था। घायल होमगार्ड को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। बाद में पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
6 साल चला केस, जज रवि कुमार दिवाकर ने सुनाया फैसला
इस मामले की अधिक जानकारी देते हुए सरकारी अधिवक्ता कुलदीप कुमार ने बताया कि यह संवेदनशील मामला पिछले 6 वर्षों से अदालत में विचाराधीन था। गवाहों के बयान और पुख्ता सबूतों के आधार पर गुरुवार को मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट के माननीय न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने आरोपी दीपक को रतिराम की हत्या का दोषी माना।
अदालत ने इसे गंभीर और क्रूर अपराध मानते हुए दोषी दीपक को फांसी की सजा सुनाई। सरकारी वकील ने कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि ऑन-ड्यूटी सरकारी कर्मचारी और समाज की रक्षा करने वाले जवानों पर हमला करने वालों के लिए यह निर्णय एक कड़ा सबक साबित होगा।
