गोरखपुर : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से तड़पते बच्चों और दम तोड़ते बचपन को देखकर हर जागरूक माता-पिता चिंतित रहते थे लेकिन अब यह चिंता खत्म हो चुकी है। उन्होंने कहा कि माफिया और मच्छर की तरह इंसेफेलाइटिस भी समाप्त हो गया है तथा ’अब हम नए युग में नए गोरखपुर और नए उत्तर प्रदेश का दर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश कर्फ्यू और दंगों से मुक्त है। अपराधी या तो जेल में हैं या दूसरे लोक की यात्रा कर चुके हैं। अब कोई अपराधी खुलेआम किसी को धमकी नहीं दे सकता, किसी का अपहरण नहीं कर सकता, किसी बेटी को जबरन उठाने का दुस्साहस नहीं कर सकता और न ही किसी व्यापारी से फिरौती वसूल सकता है। हर व्यक्ति सुरक्षित है और सभी के लिए सुरक्षा की गारंटी है।
गोरखपुर दौरे के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ
गोरखपुर में मेडिकल के लिए बड़ा इंतजाम
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सभी जिला अस्पतालों में दस-दस बेड की ’डायलिसिस यूनिट’ शुरू कर रही है। आदित्यनाथ ने गोरखपुर में ’इंडियन मेडिकल एसोसिएशन’ (आईएमए) के ’चैरिटेबल ब्लड सेंटर’ के उद्घाटन के अवसर पर कहा कि चिकित्सा प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचे में प्रगति के बावजूद रक्त का निर्माण नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए अधिक प्रयास करने का आह्वान किया और चिकित्सकों से पेशेवर रक्तदान की प्रथा पर अंकुश लगाने में मदद करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे संक्रमण का गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने स्वैच्छिक रक्तदान को जरूरतमंद लोगों के प्रति संवेदनशीलता की अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि मेरी आप सभी से रक्तदान की अपील है क्योंकि हम रक्त की मांग को पर्याप्त आपूर्ति के साथ पूरा करने में सक्षम नहीं हैं। चिकित्सकों को अपने स्तर पर सोशल मीडिया मंचों का उपयोग कर लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित करना चाहिए और समय-समय पर अपील करनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों से विभिन्न बीमारियों से पीड़ित पेशेवर रक्तदाताओं के मामलों को सामने लाने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अगर विभिन्न बीमारियों से पीड़ित पेशेवर रक्तदाताओं की जांच नहीं की गई तो भविष्य में हमें संक्रमण के गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है। आदित्यनाथ ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र और रक्तदान प्रणाली में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।
उद्घाटन समारोह के मंच से पूर्वी उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में आए सकारात्मक परिवर्तन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले गोरखपुर का बीआरडी मेडिकल कॉलेज ही इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रमुख केंद्र था। स्थिति यह थी कि एक ही बेड पर चार-चार मरीज तक भर्ती रहते थे, तीसरी मंजिल पर इंसेफेलाइटिस वार्ड था और वहां पंखे, शौचालय एवं अन्य जरूरी सुविधाओं का अभाव था।
इन जिलों में मेडिकल कॉलेज शुरू
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले जो बीआरडी मेडिकल कॉलेज स्वयं अस्वस्थ था, आज वही सुपर स्पेशियलिटी सेंटर और इंसेफेलाइटिस समेत विभिन्न बीमारियों के उपचार का प्रमुख केंद्र बन गया है। उन्होंने कहा कि गोरखपुर में एम्स भी स्थापित हो चुका है तथा महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, बहराइच, गोंडा, अयोध्या और अंबेडकरनगर समेत विभिन्न जिलों में मेडिकल कॉलेज शुरू हो चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 75 जिले हैं, जबकि मेडिकल कॉलेजों की संख्या 85 हो गई है, दो एम्स भी संचालित हैं। उन्होंने कहा कि एमबीबीएस की सीट 4600 से बढ़कर 13500 से अधिक हो चुकी हैं और पीजी की सीट दोगुनी हुई हैं। आदित्यनाथ ने कहा कि एक समय उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जिले की पहचान किसी न किसी दुर्दांत माफिया से जुड़ गई थी, डॉक्टर उनके शिकार बनते थे।
उन्होंने कहा कि गोरखपुर में डॉक्टरों का अपहरण होता था, उनसे रंगदारी मांगी जाती थी, उन्हें धमकी भरे फोन आते थे और उनके चेंबर में घुसकर मारपीट की जाती थी तथा इन घटनाओं के खिलाफ उन्हें चिकित्सकों के साथ सड़कों पर आंदोलन करना पड़ता था। आज गोरखपुर के साथ पूरे राज्य में चिकित्सक, व्यापारी और नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं तथा अब उत्तर प्रदेश की पहचान माफिया से नहीं बल्कि ’वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज’ के लक्ष्य से बन रही है। उन्होंने चैरिटेबल ब्लड सेंटर और निशुल्क बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) शुरू करने के लिए आईएमए की गोरखपुर इकाई की सराहना की और कहा कि यह चिकित्सा समुदाय की सामाजिक जिम्मेदारी को दर्शाता है।
