उत्तर प्रदेश में अब केवल धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन ही नहीं, बल्कि प्रकृति और रोमांच पर आधारित 'इको-टूरिज्म' के लिए भी जाना जाएगा। यूपी इको-टूरिज्म विकास बोर्ड ने कम लोकप्रिय लेकिन प्राकृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्रों को विकसित करने का बीड़ा उठाया है। इस कड़ी में फिरोजाबाद और गाजीपुर के दो महत्वपूर्ण स्थलों का चयन किया गया है, जहां करोड़ों रुपये की लागत से अत्याधुनिक पर्यटन सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
फिरोजाबाद और गाजीपुर बनेंगे इको-टूरिज्म हब (फाइल फोटो | PTI)
फिरोजाबाद का रपड़ी पार्क: एडवेंचर और रोमांच का नया केंद्र
फिरोजाबाद के रपड़ी इको पार्क में दूसरे चरण (Phase-2) के विकास कार्यों के लिए 5 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। यहां की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे एक 'एडवेंचर हब' के रूप में तैयार किया जा रहा है। पर्यटकों के लिए यहां वॉल क्लाइम्बिंग और वुडन डेक जैसी रोमांचक गतिविधियां शुरू की जा रही हैं।
प्रकृति के करीब जाने के लिए यहां एक खास 'नेचर ट्रेल' बनाया जा रहा है, जहां पर्यटक पैदल घूमकर प्राकृतिक सुंदरता का आनंद ले सकेंगे। इसके अलावा, पर्यटकों के रुकने के लिए आधुनिक स्विस टेंट और गोल हट की सुविधा भी होगी, जो उन्हें जंगलों के बीच रहने का अनुभव कराएगी। सेल्फी प्वाइंट, इंटरप्रिटेशन सेंटर और टिकट काउंटर जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ रपड़ी को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
गाजीपुर का कामाख्या वन पार्क: तितलियों और फूलों का स्वर्ग
गाजीपुर में स्थित कामाख्या वन पार्क को करीब 1 करोड़ रुपये की लागत से एक 'नेचर वंडरलैंड' में बदला जा रहा है। यहां का मुख्य आकर्षण 'बटरफ्लाई गार्डन' होगा, जहां प्रकृति प्रेमी रंग-बिरंगी तितलियों की विभिन्न प्रजातियों को करीब से देख सकेंगे। बच्चों और परिवारों को ध्यान में रखते हुए यहां चिल्ड्रेन पार्क, लैंडस्केप पार्क और आकर्षक वाटर फाउंटेन भी बनाए जा रहे हैं। कामाख्या वन पार्क में बनने वाला 'एंट्री प्लाजा' और 'इंटरप्रिटेशन सेंटर' आने वाले सैलानियों को इस क्षेत्र की जैविक विविधता और वन संपदा के बारे में रोचक जानकारियां प्रदान करेगा। पेयजल, पोल लाइट और सुंदर बेंच जैसी सुविधाओं के साथ यह स्थल स्थानीय लोगों के लिए एक बेहतरीन पिकनिक स्पॉट और पर्यटकों के लिए शांतिपूर्ण विश्राम स्थल बनेगा।
स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
सरकार की इस पहल का उद्देश्य केवल पर्यटन को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करना भी है। इन केंद्रों के विकसित होने से गाइड, होटल व्यवसाय, परिवहन और स्थानीय हस्तशिल्प को नया बाजार मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि उत्तर प्रदेश में इको-टूरिज्म की असीम संभावनाएं हैं, और इन परियोजनाओं के पूरा होने से प्रदेश के उन हिस्सों को नई पहचान मिलेगी जो अब तक मुख्य पर्यटन धारा से दूर थे।
