उन्नाव रेप केस की पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में मौत के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने अपने पिता की हिरासत में मौत के मामले में पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और 6 अन्य को दी गई सजा बढ़ाने की मांग की थी। कोर्ट ने अपील दायर करने में 1945 दिनों की देरी के आधार पर अपील खारिज की। न्यायालय ने कहा कि अपीलकर्ता देरी को माफ करने के लिए कोई 'पर्याप्त कारण' साबित करने में विफल रही है। निचली अदालत ने 2018 में इस मामले में सेंगर को 10 साल की कैद की सजा सुनाई थी।
कुलदीप सिंह सेंगर (फाइल फोटो)
दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। कोर्ट ने सेंगर सहित सभी सात दोषियों को 10-10 साल की सजा और प्रत्येक पर 10-10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
न्यायिक हिरासत के दौरान मौत
मामले में एक अहम मोड़ तब आया जब पीड़िता के पिता की 9 अप्रैल 2018 को न्यायिक हिरासत के दौरान मौत हो गई। दरअसल, 4 जून 2017 को पीड़िता द्वारा सेंगर पर दुष्कर्म का आरोप लगाने के बाद, उसके भाई अतुल सिंह और सहयोगियों ने पीड़िता के पिता के साथ बेरहमी से मारपीट की थी और फिर उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया था। बाद में उन्हें जेल भेजा गया, जहां से कुछ ही घंटों के भीतर तबीयत बिगड़ने पर जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी मौत हो गई।
तीस हजारी कोर्ट ने सुनाई थी ये सजा
इसके बाद 20 दिसंबर 2019 को दुष्कर्म मामले में तीस हजारी कोर्ट ने सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया, जिसमें से 10 लाख रुपये पीड़िता को मुआवजे के रूप में देने का निर्देश दिया गया।
