बिहार के बांका जिले में एक गांव है, जहां काफी संख्या में आदिवासी रहते हैं। यहां शादी में लड़कियों का परिवार लड़कों के परिवार से दहेज लेता है। इस अनूठी परंपरा को यहां के लोग बड़ी शिद्दत से निभात हैं। सदियों पुरानी इस परंपरा में लड़कों का परिवार लड़कियों को दहेज देता है। वैसे तो आदिवासी समाज में दहेज का कोई नियम नहीं है। लेकिन यहां सदियों से चली आ रही परंपरा को वह दिल से पूरा करते हैं। आइए जानते हैं, क्या है इस गांव की ये अनोखी परंपरा।
बांका, गांव
आपको बता दें कि बांका जिले के मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूरी पर एक सोखा पहाड़ है के पास यह गांव बेलहर प्रखंड की रंगा पंचायत के वार्ड 10 श्रीनगर में है, जहां दूल्हे का परिवार दुल्हन को इस परंपरा को निभाने के लिए 13 रुपए दहेज में देता है। यहां के लोग इस परंपरा को पूरे दिल से निभाते जले आ रहे हैं।
ऐसे शुरु हुई परंपरा
गांव की इस परंपरा को लेकर यहां के लोगों का कहना है कि एक बार गांव की एक लड़की ने अपने परिवार के खिलाफ जाकर शादी कर ली थी, जिसके बाद उसके पिता जब अपनी बटी से मिलने गए तो उन्हें वहां स्वागत के तौर पर 5 रुपए दिए गए। कुछ दिनों बाद जब मां मिलने गई तो चार रुपये दिए गए। उसके बाद जब लड़की के परिवार के और लोग भी गए तो उन्हें दो-दो रुपये दिए गए।
13 रुपए दान देने की परंपरा
उसके बाद से यह इस गांव की परंपरा बन गई कि जब भी किसी दूल्हा-दुल्हन की शादी की जाती है तो लड़के के परिवार की तरफ से लड़की के परिवार को 13 रुपये दिए जाते हैं। आदिवासी समाज में रीति रिवाज को बड़े शिद्दत से मनाया जाता है। इनके समाज में दहेजप्रथा का कोई नियम नहीं है।
