नासिक : टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में कार्यरत एक पीड़ित महिला कर्मचारी के परिवार ने लगातार दिमागी torchure के चलते उसके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में आई भारी गिरावट को लेकर अपना दर्द साझा किया नाम न छापने की शर्त पर पीड़ित की परिजन ने बताया कि वह महत्वाकांक्षी युवती..जो कभी अपने करियर को लेकर बहुत उत्साहित थी..TCS में जॉब लगने के बाद बेहद खुश रहने वाली पीड़िता पिछले कुछ महीनों से तनाव और चिंता के साये में जीने लगी थी
(सांकेतिक फोटो-Istcok)
कुछ ही दिनों में काम से लौटने के बाद पीड़िता के व्यवहार में आया बदलाव परिवार के लिए चिंता का विषय बन गया था लेकिन वो अपनों को परेशानी से बचाने के लिए अक्सर अपनी पीड़ा छिपा लिया करती थी। पीड़िता की नानी ने भावुक होते हुए एक पुरानी घटना का जिक्र किया..जब लगभग एक साल पहले उनकी पोती ऑफिस में अचानक बेहोश हो गई थी। उसे आनन-फानन में पास के अस्पताल ले जाया गया, लेकिन होश में आने के बाद भी उसने इस घटना के पीछे के असली कारणों को किसी से साझा नहीं किया। अब जब TCS में महिलाओं के साथ हुई घटना का खुलासा हुआ तो परिवार को उस पुरानी घटना के पीछे कोई गंभीर वजह होने का अंदेशा हो रहा है।
पेशेवर मजबूरी ने ट्रामा का काम किया-परिजन
परिजनों के अनुसार, उनकी पोती पिछले दो साल से TCS में काम कर रही थी। उसने कई बार अपनी परेशानियों का जिक्र तो किया, लेकिन वह इस सोच के साथ खुद को रोक लेती थी कि वह तीन साल का कार्यकाल पूरा किए बिना कंपनी नहीं बदल सकती। इस पेशेवर मजबूरी ने उसके लिए एक मानसिक घुटन और ट्रामा का काम किया..जिससे उसे क्रॉनिक माइग्रेन (पुराना सिरदर्द) की समस्या हो गई..काम पर जाने और वहाँ से लौटने के दौरान उसके चेहरे पर अक्सर तनाव साफ दिखाई देता था।
इस पूरे घटनाक्रम का असर उसके निजी जीवन पर भी पड़ा क्योंकि उसकी शादी हुए अभी कुछ ही महीने हुए थे। मायके पक्ष के लोगों को डर है कि इस मानसिक आघात का असर उसके नए वैवाहिक जीवन पर पड़ सकता है। पीड़िता के ससुराल वाले भी इस स्थिति को लेकर बेहद चिंतित हैं।
नानी ने बताया, "मेरी पोती बहुत महत्वाकांक्षी है; वह केवल काम करना चाहती थी और परिवार का नाम रोशन करना चाहती थी। पीड़िता का परिवार चाहता हैं कि इस मामले में जल्द से जल्द न्याय हो, ताकि पीड़िता और हमारे परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। परिवार ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने जीवन में कभी पुलिस स्टेशन का दरवाजा नहीं खटखटाया था, लेकिन इस घटना ने उन्हें झकझोर कर रख दिया है।
वे अब सरकार से कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इस मामले में अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य की तलाश जारी है। अब तक 12 पीड़िताएं सामने आ चुकी हैं और 9 FIR दर्ज की गई हैं।
