झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (14वीं JPSC) में अनियमितताओं और फर्जीवाड़े का विवाद अब देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर पहुंच चुका है। परीक्षा में भारी गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है, जिस पर अदालत आगामी 24 अगस्त (सोमवार) को सुनवाई करने जा रही है।
CBI जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग पर सोमवार को होगी सुनवाई (फाइल फोटो)
पीटीआई के मुताबिक, यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगण की ओर से अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से दायर की गई है। याचिका में मांग की गई है कि 19 अप्रैल को आयोजित हुई JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा की जांच CBI या किसी निष्पक्ष स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। साथ ही, कथित धांधली के कारण इस परीक्षा को पूरी तरह रद्द कर नए सिरे से, सुरक्षित माहौल में दोबारा परीक्षा आयोजित करने का निर्देश दिया जाए।
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ओएमआर शीट वायरल होने से बढ़ा विवाद
यह पूरा विवाद 2 जुलाई को प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद शुरू हुआ था। याचिका के अनुसार, परिणाम जारी होने के बाद एक सफल अभ्यर्थी की OMR शीट की कार्बन कॉपी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। आरोप है कि उक्त अभ्यर्थी ने प्रश्नपत्र-1 के 100 में से केवल 48 प्रश्नों के ही उत्तर दिए थे, फिर भी उसे उत्तीर्ण घोषित कर दिया गया। इस घटना के सामने आने के बाद राजधानी रांची समेत पूरे राज्य में अभ्यर्थियों और छात्रों ने जोरदार विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट से स्वतंत्र कमेटी और ऑडिट की मांग
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है कि सीबीआई जांच के अलावा सुप्रीम कोर्ट या किसी हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय स्वतंत्र समिति बनाई जाए। इस समिति में फॉरेंसिक साइंस, साइबर सुरक्षा, आईटी और ओएमआर मूल्यांकन के विशेषज्ञों को शामिल किया जाए। इसके अलावा, ओएमआर स्कैनिंग, कोडिंग और रिजल्ट तैयार करने की प्रणाली का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए, ताकि यह साफ हो सके कि गड़बड़ी से प्रभावित अभ्यर्थियों को अलग किया जा सकता है या नहीं।
याचिका में यह भी मांग की गई है कि JPSC, संबंधित एजेंसियों और परीक्षा केंद्रों के कर्मचारियों को निर्देश दिए जाएं कि वे सभी मूल OMR शीट, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और रिजल्ट जनरेशन का डेटा सुरक्षित रखें। गौरतलब है कि इससे पहले झारखंड सरकार ने भारी जनविरोध के बाद 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द कर दिया था, जिस पर बाद में झारखंड हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।
