Super Typhoon Dolphin: भारत में सालभर में होने वाली बारिश का 75 फीसद हिस्सा मानसून के चार महीनों में ही बरस जाता है। भारत का मौसम और फसल चक्र भी Monsoon पर ही निर्भर करता है। मानसून अच्छा होने पर देश में महंगाई भी नियंत्रित रहती है और मानसून में बारिश कम होने से फसलों पर बुरा असर पड़ता है, जिससे महंगाई प्रचंड रूप धारण कर लेती है। जून से 3 अगस्त तक के IMD के आकड़ों के अनुसार देश के कई राज्यों में बहुत कम बारिश हुई है। इसमें मेघालय भी शामिल है, जहां 58 फीसद कम बारिश दर्ज की गई है। इसी तरह बिहार में 43, पंजाब में 39, गोवा और अरुणाचल में 37, आंध्र प्रदेश में 36, हरियाणा में 32, उत्तर प्रदेश में 28, राजस्थान में 17 और मध्य प्रदेश में 16 फीसद कम बारिश हुई है। इसके अलावा अगस्त-सितंबर में अल-नीनो का असर बहुत ज्यादा होने की संभावना है। यानी मानसून के अंतिम दो महीनों में भी बारिश कम ही होगी। इसके ऊपर अब प्रशांत महासागर में उठे डॉल्फिन नाम के सुपर टाइफून के भी मानसून पर असर डालने की आशंका है। कुल मिलाकर आने वाले दिनों में अच्छी बारिश की आपकी उम्मीदों पर पानी फिर सकता है।
प्रशांत महासागर में उठा डॉलफिन टायफून मानसून पर डाल सकता है असर (AI Image)
अभी सुपर टायफून डॉल्फिन (Dolphin) जापान के दाइतो (Daito) और रयूक्यू (Ryukyu) द्वीपों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। यह टायफून पूर्वी एशिया के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है। 175 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार वाली हवाओं के साथ आगे बढ़ रहे इस शक्तिशाली तूफान से जापान में भारी बारिश, तेज हवाओं और ऊंची-ऊंची समुद्री लहरों का खतरा मंडरा रहा है। हालांकि, यह तूफान भारत के लिए प्रत्यक्ष खतरा तो नहीं है, लेकिन मौसम वैज्ञानिक इसके मानसून पर संभावित प्रभाव को लेकर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
175KMPH की हवा, 210 किमी के झौंके
मौसम पूर्वानुमानों के मुताबिक, सुपर टाइफून डॉल्फिन फिलहाल मिनामीदाइतो द्वीप (Minamidaito Island) के उत्तर-पूर्व में है और लगभग 17 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम की ओर बढ़ रहा है। चिंताजनक यह है कि इसके साथ 175 किमी प्रति घंटे की लगातार हवाएं चल रही हैं, जबकि झोंकों की रफ्तार 210 किमी प्रति घंटे तक पहुंच रही है। आज यानी गुरुवार 6 अगस्त तक इसके दाइतो द्वीपों के पास पहुंचने और कल यानी शुक्रवार 7 अगस्त को ओकिनावा क्षेत्र को प्रभावित करने की संभावना जताई गई है।
गूगल मैप पर डॉल्फिन टायफून की स्थिति
पूर्वानुमानों के अनुसार तूफान के प्रभाव से रयूक्यू और अमामी द्वीप समूह में 100 से 200 मिमी तक बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर तो 350 मिमी तक भी बारिश होने की आशंका है। इसके अलावा समुद्र में 10 से 11 मीटर ऊंची लहरें और विनाशकारी हवाएं भी जनजीवन को प्रभावित कर सकती हैं।
मानसून पर कैसे असर डालेगा डॉल्फिन?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पश्चिमी उत्तर प्रशांत महासागर में बनने वाले शक्तिशाली टायफून और भारतीय मानसून के बीच एक तरह का कॉम्पटीशन देखने को मिलता है। दोनों मौसम प्रणालियां वातावरण में उपलब्ध नमी, गर्मी और ऊर्जा का इस्तेमाल करती हैं। जब पश्चिमी प्रशांत में अत्यधिक शक्तिशाली चक्रवात जन्म लेते हैं, तो वहां संवहन (कन्वेक्शन) बढ़ जाता है, जबकि बंगाल की खाड़ी के ऊपर गरज-चमक वाले बादलों और कम दबाव के क्षेत्रों के बनने की संभावना अस्थायी रूप से कम हो सकती है।
बता दें कि बंगाल की खाड़ी भारतीय मानसून के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र मानी जाती है। यहीं बनने वाले कम दबाव के क्षेत्र और डिप्रेशन मध्य, पूर्वी और उत्तरी भारत में व्यापक मानसूनी बारिश लेकर आते हैं। अगर इन प्रणालियों का निर्माण कुछ समय के लिए रुक जाता है, तो देश के कई हिस्सों में मानसूनी बारिश की तीव्रता घट सकती है और सूखे जैसी स्थिति बन सकती है।
क्या डॉल्फिन के कारण आएगा लंबा ब्रेक मानसून?
सिर्फ सुपर टायफून डॉल्फिन के कारण भारत में लंबे समय तक 'ब्रेक मानसून' जैसी स्थिति बनने की संभावना कम है। हालांकि, इसका प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि यह तूफान कितने समय तक शक्तिशाली बना रहता है और आगे इसकी दिशा क्या होती है। मौजूदा मौसम मॉडल अलग-अलग संकेत दे रहे हैं। कुछ मॉडल इसे चीन के वेनझोउ के पास पहुंचने का अनुमान लगा रहे हैं, जबकि कुछ अन्य इसे ताइझोउ क्षेत्र की ओर बढ़ता दिखा रहे हैं।
IMD ने जारी की देश में मानसून की सैटेलाइट तस्वीर
मानसून पर अन्य जलवायु कारक भी डालते हैं असर
भारत का मौजूदा मानसून सिर्फ एक टायफून से प्रभावित नहीं होता। इस समय अल नीनो, विकसित होता हिंद महासागर द्विध्रुव (Indian Ocean Dipole-IOD) और बंगाल की खाड़ी में बनने वाले कम दबाव के क्षेत्रों की आवृत्ति जैसे बड़े जलवायु कारक भी एक्टिव हैं। ऐसे में सुपर टायफून डॉल्फिन कुछ दिनों के लिए नए मौसम तंत्रों के गठन को धीमा कर सकता है, जिससे देश के कुछ हिस्सों में बारिश में अस्थायी कमी आ सकती है।
मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि जैसे ही यह सुपर टायफून कमजोर पड़ेगा या उष्णकटिबंधीय (Tropics) क्षेत्र से आगे निकल जाएगा, बंगाल की खाड़ी में फिर से अनुकूल परिस्थितियां बनने लगेंगी। इसके बाद कम दबाव के नए सिस्टम विकसित हो सकते हैं और मानसून दोबारा अपनी सामान्य रफ्तार पकड़ सकता है। फिलहाल विशेषज्ञ लगातार डॉल्फिन टायफून की गतिविधियों और मानसून पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव की निगरानी कर रहे हैं।
