नर्मदापुरम : मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (STR) में वन विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। वन्यजीवों की सुरक्षा और उन्हें इंसानी पहुंच से दूर रखने की जिम्मेदारी संभालने वाले प्रभारी सहायक संचालक (एसडीओ) विनोद वर्मा खुद एक जंगली सांभर को अपने हाथों से पोहा खिलाते कैमरे में कैद हुए। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद वन विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के SDO निलंबित
क्या है पूरा मामला?
वायरल हुआ 22 सेकंड का यह वीडियो 21 जून का बताया जा रहा है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की चूरना और बोरी रेंज का प्रभार संभाल रहे एसडीओ विनोद वर्मा अपने सरकारी आवास/कैंपस के लॉन में कुर्सी पर बैठकर पोहा खा रहे थे। इसी दौरान एक वयस्क जंगली सांभर उनके पास आ जाता है और अधिकारी बड़े प्यार से उसे अपनी प्लेट से पोहा खिलाते और सहलाते दिख रहे हैं। इस वीडियो के बैकग्राउंड में 1969 की फिल्म 'प्यार का मौसम' का मशहूर गाना "तुम बिन जाऊं कहां" बज रहा था। कुछ दिन पहले अधिकारी ने खुद इस वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा किया था, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया।
विशेषज्ञों और आरटीआई कार्यकर्ता ने जताई आपत्ति
पर्यावरण एवं आरटीआई कार्यकर्ता अजय दुबे ने इस वीडियो को प्रमुखता से उठाते हुए वन मंत्रालय और वन विभाग के उच्च अधिकारियों से सख्त कार्रवाई की मांग की थी। वन्यजीव विशेषज्ञों ने भी इस कृत्य पर कड़ी आपत्ति जताई।
विशेषज्ञों के अनुसार, जंगली जानवरों को इंसानी खाना (विशेषकर नमकयुक्त भोजन) खिलाना उनके स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक होता है। इसके अलावा, ऐसा करने से जानवर इंसानी भोजन के आदी हो जाते हैं और भोजन की तलाश में रिहायशी इलाकों में आने लगते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) का खतरा बढ़ जाता है।
मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम का उल्लंघन
मामले के तूल पकड़ने और सोशल मीडिया पर बवाल मचने के बाद, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की क्षेत्र संचालक राखी नंदा ने प्रमुख सचिव (वन) के निर्देश पर कार्रवाई के आदेश जारी किए।
आदेश में कहा गया है कि एसडीओ विनोद वर्मा का यह कृत्य एक वन्यजीव के साथ अनुचित और अस्वाभाविक व्यवहार को दर्शाता है। इसे शासकीय कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही और असंवेदनशीलता माना गया है। वन विभाग ने इसे मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 का उल्लंघन माना है।
निलंबन अवधि के दौरान विनोद वर्मा का मुख्यालय सहायक संचालक कार्यालय, पिपरिया निर्धारित किया गया है। उन्हें क्षेत्र संचालक की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय न छोड़ने का निर्देश दिया गया है।
एक जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी द्वारा वन्यजीव प्रबंधन के बुनियादी सिद्धांतों की अनदेखी करना चिंताजनक है। जंगली जानवरों को पालतू बनाने या उन्हें इंसानी खाना खिलाने से प्राकृतिक व्यवहार प्रभावित होता है, जो कि वन्यजीव संरक्षण कानूनों की भावना के पूर्णतः विरुद्ध है।
