Saket Building Collapse: दक्षिण दिल्ली के साकेत इलाके में बहुमंजिला इमारत गिरने की घटना ने कई परिवारों और छात्रों को गहरे सदमे में डाल दिया है। इस हादसे में छह लोगों की जान चली गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। लेकिन यह हादसा सिर्फ एक इमारत के गिरने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके साथ कई छात्रों के सपने, मेहनत और भविष्य की योजनाएं भी प्रभावित हो गईं। जिस इमारत के ढहने (Saket Imarat Hadsa) की घटना हुई, वहां और उसके आसपास कई कोचिंग संस्थान, पुस्तकालय, छात्रावास और भोजनालय मौजूद हैं। यहां देश के अलग-अलग राज्यों से आए छात्र मेडिकल, इंजीनियरिंग और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।
मलबे में दबे छात्रों के सपने, दोस्तों को खोने का दर्द (फोटो: एआई)
विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट (FMG), नीट, गेट और अन्य परीक्षाओं की तैयारी करने वाले सैकड़ों छात्र इस इलाके में रहते और पढ़ाई करते हैं। पीटीआई भाषा के मुताबिक, हादसे के समय पास के एक पुस्तकालय में पढ़ रहे कई छात्रों ने उस भयावह पल को याद किया। झारखंड के बोकारो से आए एक छात्र ने बताया कि घटना के दौरान उन्हें हल्का कंपन महसूस हुआ था। कुछ ही क्षणों बाद पूरी इमारत ढह गई। उन्होंने इस हादसे में अपने एक करीबी दोस्त को खो दिया, जिससे वह बेहद दुखी हैं। कई छात्रों का कहना है कि हादसे के समय आसपास के पुस्तकालयों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद थे।
लोगों में मची थी अफरा-तफरी
अचानक जमीन में कंपन महसूस होने के बाद लोग घबरा गए और अपनी जान बचाने के लिए बाहर की ओर दौड़ पड़े। पीटीआई भाषा के अनुसार, कुछ छात्रों ने बताया कि जब वे बाहर निकले तो चारों ओर धूल का गुबार छाया हुआ था और लोगों में अफरा-तफरी मची हुई थी। हादसे के बाद का दृश्य छात्रों के लिए किसी डरावने सपने से कम नहीं था। कई लोग अपनी किताबें, लैपटॉप, मोबाइल और अन्य जरूरी सामान वहीं छोड़कर भाग गए। बाद में जब कुछ छात्र अपना सामान लेने वापस पहुंचे तो उन्हें पता चला कि बहुत सी चीजें मलबे और धूल के नीचे दब चुकी हैं।
कई छात्र मानसिक रूप से भी प्रभावित
इस घटना का असर केवल भौतिक नुकसान तक सीमित नहीं है। कई छात्र मानसिक रूप से भी प्रभावित हुए हैं। कुछ ने अपने दोस्तों को खो दिया है, जबकि कई घायल हुए हैं। आने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर पहले से तनाव में रहने वाले छात्रों के लिए यह हादसा और बड़ी चुनौती बन गया है। उनका कहना है कि अब पढ़ाई पर ध्यान लगाना मुश्किल हो रहा है। स्थानीय लोगों ने भी इलाके की कई इमारतों की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं।
पढ़ाई जारी रखनी होगी...
उनका कहना है कि कुछ भवनों में तय सीमा से अधिक मंजिलें बनाई गई हैं और पूरे क्षेत्र का संरचनात्मक निरीक्षण कराया जाना चाहिए। वहीं कुछ छात्रों ने बचाव कार्य शुरू होने में हुई देरी को लेकर भी चिंता जताई है। फिलहाल यह हादसा पूरे इलाके के लिए एक बड़ा झटका बन गया है। छात्रों का कहना है कि मुश्किल हालात के बावजूद उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रखनी होगी, क्योंकि उनके सपने और भविष्य इसी से जुड़े हैं।
