Rohtas News: बिहार के रोहतास जिला स्थित प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल मां तुतला भवानी धाम (Tutla Bhawani Dham) में सोमवार शाम अचानक वॉटरफॉल का जलप्रवाह काफी तेज होने से वहां अफरा-तफरी मच गई। जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण पश्चिम बंगाल से आए 15 श्रद्धालु मंदिर के गर्भगृह में ही फंस गए। हालांकि, वन विभाग और मां तुतला भवानी धाम न्यास समिति ने तुरंत कार्रवाई की और सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। समय रहते किए गए इस रेस्क्यू ऑपरेशन से एक बड़ा हादसा टल गया।
जानकारी के मुताबिक, सोमवार को पहाड़ी क्षेत्रों में हुई मूसलाधार बारिश के बाद शाम करीब छह बजे तुतला भवानी वॉटरफॉल का जलप्रवाह अचानक बढ़ गया। उस समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में मौजूद थे। तेज बहाव के बीच गर्भगृह में दर्शन कर रहे 15 श्रद्धालुओं का बाहर निकलना मुश्किल हो गया, जिससे मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी फैल गई।
बचाव अभियान चलाकर सभी श्रद्धालुओं को निकाला गया
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और मां तुतला भवानी धाम न्यास समिति की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। स्थिति का आकलन करने के बाद संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। सुरक्षा मानकों का ध्यान रखते हुए गर्भगृह में फंसे सभी श्रद्धालुओं को एक-एक कर सुरक्षित बाहर निकाला गया और मंदिर परिसर के नीचे सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया गया।
वन विभाग ने ऊपरी हिस्से में न जाने की सलाह दी थी
वन विभाग के कॉन्स्टेबल सतानंद कुमार ने बताया कि पश्चिम बंगाल से आए महिला और पुरुष श्रद्धालु शाम के समय दर्शन के लिए गर्भगृह तक पहुंच गए थे। उन्होंने कहा कि वन विभाग की ओर से बारिश के मौसम में देर शाम ऊपरी हिस्से में नहीं जाने की सलाह पहले ही दी गई थी, क्योंकि पहाड़ी इलाकों में जलप्रवाह अचानक बढ़ सकता है। इसके बावजूद श्रद्धालु आगे बढ़ गए और जलस्तर बढ़ने के कारण वहीं फंस गए।
रेस्क्यू अभियान में वन विभाग के कॉन्स्टेबल आशीष कुमार, कॉन्स्टेबल सतानंद कुमार, मां तुतला भवानी धाम न्यास समिति के अध्यक्ष गुरुचरण यादव, भरत यादव सहित वन विभाग और न्यास समिति के अन्य सदस्यों ने मिलकर काम किया। सभी श्रद्धालुओं के सुरक्षित बाहर आने के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली।
पिछले साल भी हो चुकी है ऐसी ही घटना
गौरतलब है कि तुतला भवानी धाम में इस तरह की घटना पहली बार नहीं हुई है। पिछले साल भी वॉटरफॉल का जलस्तर अचानक बढ़ने से 10 श्रद्धालु गर्भगृह में फंस गए थे। तब भी वन विभाग ने सफल रेस्क्यू अभियान चलाकर सभी को सुरक्षित बचा लिया था। लगातार दूसरी बार सामने आई इस घटना के बाद प्रशासन और वन विभाग ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि मानसून के दौरान सुरक्षा निर्देशों का पालन करें और प्रतिकूल मौसम या देर शाम के समय जोखिम उठाकर ऊपरी क्षेत्रों की ओर जाने से बचें।
