बारिश के बाद क्यों सताएगी उमस वाली गर्मी? समझिए मानसून की विदाई, चक्रवात और October Heat का पूरा गणित

अभी तो देशभर में खासतौर पर उत्तर भारत में मानसून की गतिविधियां बनी हुई हैं। लेकिन मानसून जिस तरह से आया है, उसी तरह से उसकी विदायी भी तय है। मानसून का लौटना क्या होता है और यह कब लौटता है? चलिए जानते हैं पूरा मौसम चक्र

भारत में मानसून सिर्फ बारिश का मौसम नहीं है, बल्कि खुशहाली का प्रतीक भी है। देश की अर्थव्यवस्था मानसून के अच्छे और खराब होने पर निर्भर करती है। खेती और जल संसाधन सब कुछ इसी मौसमी व्यवस्था पर निर्भर हैं। जून से सितंबर तक एक्टिव रहने वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून का हर कोई मार्च-अप्रैल से ही इंतजार करने लगता है। लगभग 4 महीने देश के ज्यादातर हिस्सों को तरबतर करने और किसानों को मुस्कान देने के बाद मानसून धीरे-धीरे विदायी लेने लगता है। जब मानसून धीरे-धीरे भारत की मुख्य भूमि से पीछे हटने लगता है तो इसे मानसून का लौटना भी कहते हैं। अंग्रेजी में इसे Retreating Monsoon कहा जाता है और इस दौरान भी यह बारिश करते हुए ही लौटता है। इसी के साथ भारत में मौसम का एक नया चरण शुरू होता है।

What is Monsoon Withdrawl time.

मानसून की विदाई और अक्टूबर हीट के बारे में यहां जानें

आमतौर पर मानसून की वापसी सितंबर के आसपास उत्तर-पश्चिम भारत (हरियाणा, राजस्थान आदि राज्यों) से शुरू होती है। अक्टूबर आते-आते देश के अन्य हिस्सों से भी मानसून लौटने लगता है। भारत मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, मानसून की वापसी घोषित करने के लिए सिर्फ बारिश का कम होना ही पर्याप्त नहीं होता है। किसी क्षेत्र में लगातार पांच दिन तक बारिश संबंधी गतिविधि समाप्त होना, निचले क्षोभमंडल (Lower Troposphere) में एंटी-साइक्लोनिक सर्कुलेशन स्थापित होना और वातावरण की नमी में पर्याप्त कमी जैसे संकेत अहम होते हैं।

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