अयोध्या : राम मंदिर से जुड़े दान और वित्तीय लेनदेन मामलों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने जांच को और तेज करते हुए ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों और संदिग्ध कर्मियों के जिले से बाहर जाने पर रोक लगा दी है। सूत्रों के मुताबिक, संबंधित लोगों को जांच पूरी होने तक बिना अनुमति अयोध्या छोड़ने से मना किया गया है। बताया जा रहा है कि एसआईटी ने छह दिनों तक चली जांच के बाद अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर ली है। जांच के दौरान दानपात्रों में प्राप्त धनराशि के उपयोग, विभिन्न मदों में किए गए खर्च और भूमि खरीद से जुड़े दस्तावेजों की गहन पड़ताल की गई।
अयोध्या राम मंदिर (फाइल फोटो)
टीम ने वर्ष 2021 तक के पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले हैं। इसके अलावा वित्तीय लेनदेन से जुड़े तथ्यों की पुष्टि के लिए बैंक अधिकारियों से भी पूछताछ की गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि दान की राशि का उपयोग निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप हुआ या नहीं।
सूत्रों के अनुसार, जांच के दायरे में आए ट्रस्ट पदाधिकारियों और कुछ कर्मचारियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, मामले में अभी तक किसी भी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं किया गया है और जांच जारी है। एसआईटी जल्द ही अपनी विस्तृत रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को सौंप सकती है।
कहां गया तीन किलोग्राम वजनी चांदी के दीपक
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की हेराफेरी के आरोपों के बीच लखनऊ के एक जौहरी ने शनिवार को दावा किया कि उन्हें मंदिर को दान में दिए गए तीन किलोग्राम वजनी चांदी के दीपक और चांदी की अन्य वस्तुओं की मौजूदा स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के उत्तर भारत प्रमुख अनुराग रस्तोगी ने कहा कि उन्हें एसोसिएशन द्वारा भूमिपूजन (पांच अगस्त 2020) से पहले दान किए गए 39.26 किलोग्राम चांदी के सामान का भी कोई पता नहीं है।
उन्होंने कहा, ’’मेरे परिवार की ओर से मैंने तीन किलोग्राम वजनी चांदी का दीपक ’गुप्त दान’ के रूप में राम मंदिर को अर्पित किया था। इसके अलावा, आईबीजेए उत्तर भारत प्रमुख के रूप में हमने 30 चांदी की वस्तुएं (34.64 किलोग्राम) और चार चांदी की ईंटें (4.62 किलोग्राम) भी दान की थीं।
रस्तोगी ने बताया कि यह दान मार्च 2020 में उस समय किया गया था जब अयोध्या में रामलला की मूर्ति को अस्थायी संरचना में स्थानांतरित किया गया था। उन्होंने दावा किया कि यह दान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा की सहमति से किया गया था।
उन्होंने कहा कि बाद में उन्होंने और आईबीजेए से जुड़े अन्य सदस्यों ने भी चांदी के दान दिए, जिन्हें मंदिर निर्माण कार्य में उपयोग के लिए सौंपा गया था। रस्तोगी के अनुसार, दान की गई चांदी को विधिवत पूजा के बाद ट्रस्ट कार्यालय में सौंपा गया था और इसकी रसीद भी दी गई थी, हालांकि तीन किलोग्राम वजनी चांदी के दीपक की कोई रसीद उन्हें नहीं मिली।
