Rajkot News: राजकोट सिविल अस्पताल में शवों की पहचान और सुपुर्दगी को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। 92 वर्षीय हरसुखलाल ठाकर के परिवार का आरोप है कि अस्पताल के कोल्ड स्टोरेज से उनका शव गलती से दूसरे परिवार को सौंप दिया गया और परिवार के पहुंचने से पहले ही रामनाथपरा श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। हरसुखलाल ठाकर का 28 सितंबर को निधन हुआ था। उनकी बेटी अमेरिका से राजकोट आने वाली थीं। इसलिए परिवार ने उनके अंतिम दर्शन के लिए उनके शव को सिविल अस्पताल के कोल्ड स्टोरेज में रखने की व्यवस्था की थी। 30 सितंबर को जब ठाकर परिवार शव लेने सिविल अस्पताल पहुंचा, तब उन्हें पता चला कि हरसुखलाल ठाकर के शव का पहले ही अंतिम संस्कार किया जा चुका है।
राजकोट सिविल अस्पताल में शव की अदला-बदली का गंभीर मामला
अन्य परिवार को हरसुखलाल ठाकर का शव सौंपा
परिवार के मुताबिक, 29 सितंबर को मुंबई से आए एक अन्य परिवार को हरसुखलाल ठाकर का शव सौंप दिया गया था। इसके बाद उस शव को रामनाथपरा श्मशान घाट ले जाकर अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। ठाकर परिवार का कहना है कि उन्हें इस पूरी घटना की कोई जानकारी नहीं दी गई। हरसुखलाल की बेटी भी अमेरिका से अपने पिता के अंतिम दर्शन के लिए राजकोट पहुंची थीं, लेकिन उनके पहुंचने से पहले ही पिता का अंतिम संस्कार हो चुका था। परिवार ने इस मामले में जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
बेटे ने बताई पूरी घटना
मृतक के बेटे उमेशचंद्र ठाकर के मुताबिक, उनके पिता 92 वर्ष के थे। वह सेवानिवृत्त आचार्य थे, अनुशासित जीवन जीते थे और समाजसेवा से जुड़े थे। उमेशचंद्र ने बताया कि घर में गिरने के बाद उनके पिता के पैर में फ्रैक्चर हुआ था। उन्हें डोशी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका ऑपरेशन सफल रहा। करीब दो से ढाई दिन तक उनकी तबीयत ठीक रही, लेकिन बाद में ब्लड प्रेशर की समस्या बढ़ने पर उन्हें ICU में ले जाना पड़ा। परिवार की एक बेटी अमेरिका से आने वाली थी, इसलिए बाद में शव को राजकोट सिविल अस्पताल के कोल्ड स्टोरेज में रखने की व्यवस्था की गई। उमेशचंद्र के मुताबिक, शव को स्टोरेज में रखने से पहले परिवार के सदस्यों के नाम और मोबाइल नंबर समेत जरूरी प्रक्रिया पूरी की गई थी।
शव लेने पहुंचे तो आधे घंटे तक नहीं मिला
उमेशचंद्र ने बताया कि 30 सितंबर को उनकी बहन अमेरिका से राजकोट पहुंचीं। इसके बाद उनका छोटा भाई और उसके दो दोस्त शव लेने सिविल अस्पताल पहुंचे। परिवार के मुताबिक, करीब आधे घंटे तक उन्हें यह पता नहीं चला कि शव कहां है। इसके बाद उन्होंने अस्पताल में पूछताछ शुरू की। परिवार ने उन लोगों से संपर्क किया जो एक दिन पहले शव लेने के लिए अस्पताल आए थे। परिवार के मुताबिक, उन्हें जानकारी मिली कि कुछ लोग जरूरी पहचान और पर्ची देने के बाद शव लेकर गए थे और करीब ढाई घंटे बाद उसे रामनाथपरा श्मशान घाट ले जाकर अंतिम संस्कार कर दिया गया। उमेशचंद्र ने इसे गंभीर मिसमैनेजमेंट बताते हुए कहा कि उनके पिता के शव की जगह किसी दूसरे व्यक्ति का शव होने की बात बाद में सामने आई।
अस्पताल अधीक्षक ने बताया गंभीर और दुखद मामला
राजकोट सिविल अस्पताल के अधीक्षक कमल डोडिया ने मामले को बेहद गंभीर और दुखद बताया। उन्होंने कहा कि अस्पताल के संज्ञान में यह बात आई है कि एक व्यक्ति का शव दूसरे व्यक्ति के रिश्तेदारों को सौंपा गया हो सकता है। उन्होंने प्रभावित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि यदि ऐसा हुआ है तो यह गंभीर मामला है। अधीक्षक के मुताबिक, मामले की जांच के लिए एक जांच समिति गठित की गई है। समिति यह जांच करेगी कि शवों की अदला-बदली किस परिस्थिति में हुई और क्या ड्यूटी में किसी तरह की लापरवाही हुई।
सालों से चल रही प्रक्रिया, अब SOP बनाने की तैयारी
कमल डोडिया ने बताया कि सिविल अस्पताल में शवों को कोल्ड स्टोरेज में रखने और प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिजनों को सौंपने की व्यवस्था वर्षों से चल रही है। उन्होंने कहा कि जब किसी शव के परिजन तुरंत मौजूद नहीं होते या बाहर से आने में समय लगता है, तो अस्पताल में शव को सुरक्षित रखने की सुविधा उपलब्ध रहती है। पुलिस और मेडिकल प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित परिजनों की पुष्टि के आधार पर शव सौंपा जाता है। अधीक्षक ने कहा कि इस घटना के बाद न केवल लापरवाही की जांच की जाएगी, बल्कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए Standard Operating Procedure यानी SOP तैयार की जाएगी। अब जांच समिति के सामने मुख्य सवाल यही हैं कि 92 वर्षीय हरसुखलाल ठाकर का शव दूसरे परिवार को कैसे सौंपा गया, पहचान की प्रक्रिया में चूक कहां हुई और इस पूरे मामले के लिए जिम्मेदार कौन है। जांच समिति की रिपोर्ट के बाद ही शवों की अदला-बदली की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी की तस्वीर साफ हो सकेगी।
