Rajasthan: राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ जिले के अजीतपुरा-कुजोता क्षेत्र में सोमवार को हड़कंप मच गया। पिछले 10 महीनों से शांत चल रहा ग्रामीणों का प्रदर्शन अचानक हिंसक हो गया। धरना स्थल पर दोबारा शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र हुए ग्रामीणों पर खनन पक्ष से जुड़े लोगों ने लगाकर हमला कर दिया। इस हमले में न सिर्फ भारी पथराव किया गया, बल्कि ग्रामीणों को डराने और खदेड़ने के लिए सीधी गोलियां भी चलाई गईं, जिससे कई लोग लहूलुहान हो गए।
अस्पताल में भर्ती ग्रामीण
अंधाधुंध गोलीबारी से मची भगदड़, दो गंभीर घायल जयपुर रेफर
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमला अचानक और बेहद आक्रामक था। फायरिंग की आवाज सुनते ही धरना स्थल पर चीख-पुकार मच गई और भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई। इस खूनी हमले में कई ग्रामीणों को छर्रे और गोलियां लगी हैं। घटना के तुरंत बाद सभी घायलों को आनन-फानन में कोटपूतली के राजकीय BDM अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्राथमिक उपचार के बाद, दो ग्रामीणों की हालत बेहद नाजुक होने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल के लिए रेफर कर दिया, जहां वे जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।
"मुझ पर 4 फायर किए गए, होश आया तो पता चला..."
जयपुर के एसएमएस अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे घायल प्रदर्शनकारी महेंद्र मीणा ने होश में आने के बाद 'नवभारत' से बातचीत की। उन्होंने बताया कि, हम पिछले 10 महीनों से पूरी तरह गांधीवादी और शांतिपूर्ण तरीके से इस अवैध खनन के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे। लेकिन सोमवार को माइंस मालिक के गुंडों ने हमारे ऊपर हथियारों के साथ जानलेवा हमला कर दिया और सीधी गोलीबारी शुरू कर दी। मुझ पर अकेले चार राउंड फायर किए गए, जिससे मैं गंभीर रूप से घायल हो गया। मुझे अभी होश आया है। गांव के कुछ अन्य लोगों को भी गोलियां लगी हैं और उनकी हालत बहुत गंभीर है।
आबादी क्षेत्र में नियमों की धज्जियां उड़ाकर ब्लास्टिंग, टूट रहे हैं घर
घायल महेंद्र मीणा ने आगे बताया कि यह आंदोलन सिर्फ जमीन बचाने का नहीं, बल्कि गांव के अस्तित्व को बचाने का है। नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर घनी आबादी वाले क्षेत्र में भारी ब्लास्टिंग की जा रही है। इस अवैध ब्लास्टिंग की वजह से पूरे गांव के कई घर टूट-फूट रहे हैं। इसके अलावा, उड़ने वाली धूल और मलबे के कारण पूरे इलाके में गंभीर बीमारियां फैल रही हैं। उन्होंने संकल्प जताते हुए कहा कि जब तक यह माइंस पूरी तरह बंद नहीं हो जाती या नियमपूर्वक काम नहीं होता, तब तक हमारा यह संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।
