संगम नगरी प्रयागराज में इन दिनों महाकुम्भ का आयोजन हो रहा है। यहां हर 12 साल बाद कुम्भ मेले का आयोजन होता है और 12 कुम्भ यानी 144 साल बाद महाकुम्भ होता है। महाकुम्भ की बड़ी मान्यता है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाने के लिए यहां पहुंच रहे हैं। एक अनुमान मुताबिक महाकुम्भ 2025 में 45 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। हिंदू मान्यताओं में कुम्भ को बड़ा स्थान मिलता है। तीर्थराज प्रयागराज में महाकुम्भ मेले में आ रहे हैं तो यहां संगम स्नान के साथ ही आप बहुत कुछ कर सकते हैं। चलिए जानते हैं
महाकुम्भ स्नान के लिए आ रहे हैं तो ये पांच काम जरूर करें
प्रयागराज में महाकुम्भ मेले में शामिल होने के लिए आ रहे हैं तो ये पांच काम यहां कर सकते हैं -
पवित्र डुबकी लगाएं
महाकुम्भ के दौरान प्रयागराज आ रहे हैं तो निश्चित तौर पर यह आपके प्लान में होगा ही। यहां गंगा, यमुना और गुप्त सरस्वती नदी के संगम यानी त्रिवेणी संगम में पवित्र डुबकी लगाएं। माना जाता है कि यहां पर डुबकी लगाने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। श्रद्धालु महाकुम्भ के दौरान यहां तीनों नदियों के पवित्र जल में डुबकी लगाकर स्वयं को पवित्र कर सकते हैं।
साधुओं और बाबाओं से मिलें
महाकुम्भ के दौरान तीर्थराज प्रयागराज में आ रहे हैं तो आपको जानकारी होगी ही कि इस समय देशभर से तमाम बड़े-बड़े साधू-संत, महात्मा और बाबा यहां आए हुए हैं। प्रयागराज में आप इन संतों से मिल सकते हैं, जिन्होंने अपना जीवन आध्यात्म को समर्पित कर दिया है। IIT वाले बाबा सहित कई बाबा सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहे हैं। यहां नागा साधुओं से मिलें, हो सके तो उनसे आशीर्वाद लें और उनकी सेवा करें। उनकी जीवनशैली को भी समझने का प्रयास करें।
AI से स्वयं को अपडेट करें
कु्म्भ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यहां पर कुम्भ सहायक नाम का AI आधारित चैटबोट लगाया गया है। यह चैटबोट आपको रियल टाइम अपडेट देने के साथ ही अलग-अलग कार्यक्रमों का शेड्यूल, ट्रेवेल गाइडेंस और पर्सनलाइज्ड सपोर्ट भी मुहैया कराता है। यहां पर ट्रैवेल टिप्स और क्राउड नेविगेशन भी चैटबोट के जरिए पा सकते हैं। कुल मिलाकर यह AI चैटबोट प्रयागराज में आपकी धार्मिक यात्रा को बेहद आसान बना देगा।
ऐतिहासिक स्थलों का दौरा करें
महाकुम्भ के दौरान पवित्र संगम में डुबकी लगाने के साथ ही यहां के ऐतिहासिक स्थलों का दौरा भी करें। प्रयाग एक बहुत ही पुराना शहर है और यहां पर कई अचंभित करने वाले ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं। यहां पर मुगल बादशाह अकबर का बनाया इलाहाबाद किला है। यहीं पर प्राचीन अशोक स्तंभ भी है, जो शहर के प्राचीन इतिहास का जीता-जागता उदाहरण है। प्रयागराज में आप आनंद भवन का दौरा भी कर सकते हैं, जो देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का घर हुआ करता था। यहां पर आपको आजादी की लड़ाई की खुशबू महसूस होगी।
वाराणसी भी जा सकते हैं
संगम में डुबकी लगाने के बाद आप एक छोटा सा रोड ट्रिप लेकर वाराणसी भी जा सकते हैं। करीब सवा सौ किमी की यात्रा करके आप दुनिया के सबसे पुराने शहर में पहुंच सकते हैं। काशी के नाम से मशहूर वाराणसी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर सकते हैं। यहां पर ऐतिहासिक दसाश्वमेध और अस्सी घाट पर गंगा आरती का लुत्फ ले सकते हैं। वाराणसी का फूड भी काफी मशहूर है, यहां की टमाटर चाट की दुनिया दीवानी है। इस ऐतिहासिक शहर में आप आध्यात्म का अलग ही अनुभव करेंगे।
