West Bengal Assembly Election 2026: बंगाल में ‘साइलेंट वॉर’, रणनीति बनाम भावना की सीधी टक्कर

पश्चिम बंगाल चुनाव में रैलियों के शोर के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का साइलेंट माइक्रो-मैनेजमेंट अभियान चर्चा में है। रात की बैठकों से रणनीति तय हो रही है, जबकि ममता बनर्जी भावनात्मक और अस्मिता की राजनीति पर जोर दे रही हैं। अब मुकाबला रणनीति बनाम भावना का है, जिसका फैसला ईवीएम करेगी।

West Bengal Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल अपने चरम पर है। पहले चरण की वोटिंग पूरी हो चुकी है, लेकिन राजनीतिक तापमान अभी भी ऊंचा बना हुआ है। मंचों से तीखे भाषण, नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप और लगातार हो रही रैलियां चुनावी माहौल को गरमाए हुए हैं। हालांकि, इस शोर-शराबे के बीच एक और सियासी परत सामने आ रही है—एक ऐसा “साइलेंट मिशन” जो भीड़ से दूर, बंद कमरों में आकार ले रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस बार बंगाल में सिर्फ सार्वजनिक रैलियों तक सीमित नहीं हैं। उनकी रणनीति का बड़ा हिस्सा रात के समय होने वाली बैठकों पर आधारित है, जहां बूथ स्तर से लेकर संभाग स्तर तक की विस्तृत रिपोर्ट ली जा रही है।

West Bengal Assembly Election 2026

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026

रैलियां दिन में, रणनीति रात में

बीजेपी ने पूरे राज्य को पांच हिस्सों जैसे सिलीगुड़ी, बालुरघाट, दुर्गापुर, खड़गपुर और हुगली में बांटकर माइक्रो मैनेजमेंट की रणनीति अपनाई है। सूत्रों के अनुसार, शाह हर क्षेत्र में दिन में रैली करने के बाद रात में स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ लंबी बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं। 10 अप्रैल को खड़गपुर और 13 अप्रैल को दुर्गापुर में हुई बैठकों में उन्होंने कई घंटों तक संगठन की जमीनी स्थिति, वोटर मूड और बूथ स्तर की तैयारियों की समीक्षा की। अब कोलकाता में डेरा डालकर वे दूसरे चरण की वोटिंग तक लगातार रणनीति पर काम कर रहे हैं।

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